
अभिषेक गुप्ता @ कोटा.
हाड़ौती में पिछले दिनों पड़ी तेज गर्मी ( heavy heat ) अनसुलझे रहस्य ( Unresolved mystery ) छोड़ गई। तेज गर्मी ( terrible heat ) ने कहर बरपाया। पारा 47 डिग्री ( 47 degree temperature ) के पार भी पहुंचा। आसमान से आग बरसी। भीषण गर्मी में भूख व पानी की कमी ने कई लोगों को बीमार किया। गर्मी के चलते कई लोग मौत के शिकार भी हुए।
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मौसम विभाग ( weather department ) ने कोटा जिले में भीषण लू ( Lu's OutBrak ) के चलते रेड अलर्ट ( Red Alert ) जारी किया था। इस बीच 28 मई से 6 जून तक दस दिनों में पुलिस ( Police ) रिकॉर्ड देखा तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। भीषण गर्मी के इन दस दिनों में करीब 19 लोग ऐसे थे, जिनकी मौत के कारणों का पता नहीं चल सका। ( Suspicious death ) पुलिस रिकॉर्ड में ये सभी मृतक लावारिस हैं, जो विभिन्न स्थानों पर अचेतावस्था में मिल थे या इनमें से कुछ ने अस्पताल ( Hospital ) में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
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इसमें हैरान करने वाली बात यह है कि मृतकों में 30 से 40 साल के 7 युवक थे। 22 साल का एक युवक, जबकि चिकित्सकों की मानें तो गर्मी के दिनों में भूखे पेट रहने व पानी की कमी से शरीर में सोडियम व पोटेशियम की कमी हो जाती है। इनकी कमी से दिमाग का तापमान बढ़ जाता है, जिससे दिमाग पर असर पड़ता है। अगर समय रहते तापमान का संतुलन नहीं होता तो इस स्थिति में शरीर के ऑर्गन काम करना बंद कर देते हैं और मरीज अचानक कोमा में चला जाता है।
50 से 55 साल के बुजुर्ग
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन लावारिस मृतकों में 50 से 55 साल के 8 बुजुर्ग शामिल थे, जबकि 70, 65 व 75 साल का 1 -1 बुजुर्ग, जिनकी अचेत अवस्था में मौत हुई।
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तीन थानों में अधिक...
थानेवार बात करें तो इन दस दिनों में जीआरपी में 3, गुमानपुरा में 3, नयापुरा में 3 अचेतवस्था में मृत लावारिस मिले। बोरखेड़ा में 2, भीमगंजमंडी में 1, उद्योग नगर, जवाहर नगर, कुन्हाड़ी, किशोरपुरा व कैथूनीपोल में 1-1 मृतक लावारिस मिले।
एक्सपर्ट व्यू
तेज गर्मी में बॉडी में एडीमो हो जाता है, यानी सैलिंग हो जाती है। लाल रेशेज हो जाते हंै। हाथ-पैर में जकडऩ हो जाती है। चक्कर आकर व्यक्ति गिर जाता है। वह उठ नहीं पाता। हीट स्ट्रोक होने से स्किन भी ड्राई हो जाती है। न्यूरोलॉजी लक्षण पैदा हो जाते हैं। यदि हीट स्ट्रोक का समय पर इलाज नहीं मिलता है तो मरीज की मौत भी हो जाती है। भूखे पेट व पानी की कमी से ऐसा होता है।
डॉ. पीके तिवारी, मेडिकल ज्यूरिष्ट, एमबीएस अस्पताल