कोटा

आत्मा का स्वभाव ही जीवन का वास्तविक आधार

Aug 02, 2026
Rajasthan

केशवरायपाटन. अतिशय क्षेत्र में चल रहे चातुर्मास प्रवचनों की श्रृंखला में शनिवार को गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि वह क्यों जी रहा है। उन्होंने बताया कि अधिकांश लोग परिवार, बच्चों या मृत्यु के भय के कारण जीवन जीते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि जीव का स्वभाव ही जीना है। शरीर नश्वर है, लेकिन आत्मा अमर है। शरीर और आत्मा के पृथक होने को ही मृत्यु कहते हैं, आत्मा का कभी नाश नहीं होता। गणिनी आर्यिका ने कहा कि जैसे अग्नि का स्वभाव उष्णता है, जल का शीतलता और वायु का बहना है, उसी प्रकार आत्मा का स्वभाव जीना है। मृत्यु संसार का सबसे बड़ा कष्ट है, इसलिए किसी भी जीव को कष्ट देना, हिंसा करना अथवा उसके प्राण हरना अनुचित है। उन्होंने सम्यग्दर्शन की चर्चा करते हुए उसके बाह्य व अभ्यंतर आधार बताए। बाह्य आधार त्रस नाड़ी है, जबकि अभ्यंतर आधार भव्य जीव है। सम्यग्दर्शन की प्राप्ति केवल भव्य जीव को ही होती है। आर्यिका ने आत्मस्वरूप की पहचान कर अहिंसा, आत्मचिंतन एवं सम्यग्दर्शन की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

Updated on:
02 Aug 2026 06:02 am
Published on:
02 Aug 2026 06:02 am
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45 करोड़ की सड़क एक साल में दूसरी बार टूटी, गुणवत्ता पर सवाल यपाटन मार्ग पर करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 22.50 किलोमीटर लंबी सड़क एक वर्ष के भीतर दूसरी बरसात भी नहीं झेल पाई। सड़क एक साल में दूसरी बार क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार सुवासा, बाजड और जमीतपुरा गांव के बीच करीब 15 स्थानों पर डामर जगह-जगह से उखड़ गया है और गिट्टी बाहर निकलने लगी है। क्षतिग्रस्त सड़क पर पैचवर्क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को सुवासा कस्बे में विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण विशेष रूप से रात्रि के समय वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देने से आए दिन दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से तत्काल पैचवर्क और सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, तालेड़ा से केशोरायपाटन तक सड़क निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य 15 अगस्त 2022 से शुरू हुआ था और इसे सितंबर 2023 तक पूरा किया जाना था, लेकिन सड़क के दोनों ओर लगभग डेढ़ मीटर पटरी निर्माण का कार्य अभी भी कई स्थानों पर अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर लगभग एक वर्ष पूर्व डामरीकरण किया गया था, लेकिन दिसंबर 2025 में सुवासा, बाजड और जमीतपुरा के बीच करीब 20 स्थानों पर सड़क उखड़ गई थी। उस समय संवेदक द्वारा पैचवर्क कर सड़क की मरम्मत की गई थी, लेकिन मरम्मत कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। परिणामस्वरूप जुलाई 2026 में दूसरी बरसात शुरू होते ही सड़क फिर से उखड़ गई और कई स्थानों पर गिट्टी निकलने लगी है। लगातार टूट-फूट के कारण सड़क धीरे-धीरे बड़े गड्ढों में तब्दील होती जा रही है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े व भारी वाहन गुजरते हैं। यह सड़क नेशनल हाईवे 52 व मेगा हाईवे को जोड़ती है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वाहन चालकों, किसानों, मजदूरों और आसपास के गांवह/वें के लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अभिषेक गुर्जर, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, तालेड़ा ने बताया कि तालेड़ा से सुवासा के बीच कुछ स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है और सड़क निर्माण का कुछ कार्य अभी शेष है। संवेदक का पूरा भुगतान अभी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करने के निर्देश संवेदक को दे दिए गए हैं। सड़क वर्तमान में गारंटी अवधि में है और इसकी मरम्मत संवेदक द्वारा ही कराई जाएगी।

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