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रफी के गीतों से सजी शाम

कोटा

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Newsdesk

Aug 02, 2026

Rajasthan

, सुरों से दी श्रद्धांजलि
भवानीमंडी. यादगार सांस्कृतिक मंच की ओर से शहंशाह-ए-तरन्नुम, पद्मश्री एवं सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक मोहम्मद रफी की 46वीं पुण्यतिथि पर शनिवार को ‘यादें रफी’ कार्यक्रम का आयोजन किया। इसकी शुरुआत डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने मां सरस्वती के पूजन-अर्चन के साथ की।
कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने रफी के सदाबहार गीतों की प्रस्तुतियां देकर उनकी यादों को ताजा कर दिया। महेश चौकसे ने ‘दिल कहे रुक जा रे रुक जा’, हंसराज आस्तोलिया ने ‘वादा कर ले साजना’, ललित जांगिड़ ने ‘फिरकी वाली तू कल फिर आना’, राकेश शर्मा ने ‘ना झटको जुल्फ से पानी’ तथा डॉ. विष्णु सेन ने ‘है फूलों की रानी’ गीत प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में राजेश मेहरा ने ‘खिलौना जानकर तुम तो’, अजय चतुर्वेदी ने ‘ओ दुनिया के रखवाले’, आकाश तंवर ने ‘दिन ढल जाए हाय रात न जाए’, उमेश आंजना ने ‘ये रेशमी जुल्फें, ये शरबती आंखें’, संजय श्रीमाल ने ‘क्या हुआ तेरा वादा’, सुनील मारवाड़ी ने ‘जन्म-जन्म का साथ है निभाने को’, जगदीश गुप्ता ने ‘बहारों फूल बरसाओ’, वासुदेव पालीवाल ने ‘बड़ी दूर से आए हैं’ तथा डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने ‘अकेले हैं चले आओ जहां हो’ गीत की प्रस्तुति दी। कलाकारों ने प्रस्तुतियों के माध्यम से रफी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान रफी के संगीत और उनकी अमर आवाज को याद करते हुए उनके गीतों की विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश भी दिया।

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45 करोड़ की सड़क एक साल में दूसरी बार टूटी, गुणवत्ता पर सवाल यपाटन मार्ग पर करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 22.50 किलोमीटर लंबी सड़क एक वर्ष के भीतर दूसरी बरसात भी नहीं झेल पाई। सड़क एक साल में दूसरी बार क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार सुवासा, बाजड और जमीतपुरा गांव के बीच करीब 15 स्थानों पर डामर जगह-जगह से उखड़ गया है और गिट्टी बाहर निकलने लगी है। क्षतिग्रस्त सड़क पर पैचवर्क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को सुवासा कस्बे में विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण विशेष रूप से रात्रि के समय वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देने से आए दिन दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से तत्काल पैचवर्क और सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, तालेड़ा से केशोरायपाटन तक सड़क निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य 15 अगस्त 2022 से शुरू हुआ था और इसे सितंबर 2023 तक पूरा किया जाना था, लेकिन सड़क के दोनों ओर लगभग डेढ़ मीटर पटरी निर्माण का कार्य अभी भी कई स्थानों पर अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर लगभग एक वर्ष पूर्व डामरीकरण किया गया था, लेकिन दिसंबर 2025 में सुवासा, बाजड और जमीतपुरा के बीच करीब 20 स्थानों पर सड़क उखड़ गई थी। उस समय संवेदक द्वारा पैचवर्क कर सड़क की मरम्मत की गई थी, लेकिन मरम्मत कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। परिणामस्वरूप जुलाई 2026 में दूसरी बरसात शुरू होते ही सड़क फिर से उखड़ गई और कई स्थानों पर गिट्टी निकलने लगी है। लगातार टूट-फूट के कारण सड़क धीरे-धीरे बड़े गड्ढों में तब्दील होती जा रही है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े व भारी वाहन गुजरते हैं। यह सड़क नेशनल हाईवे 52 व मेगा हाईवे को जोड़ती है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वाहन चालकों, किसानों, मजदूरों और आसपास के गांवह/वें के लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अभिषेक गुर्जर, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, तालेड़ा ने बताया कि तालेड़ा से सुवासा के बीच कुछ स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है और सड़क निर्माण का कुछ कार्य अभी शेष है। संवेदक का पूरा भुगतान अभी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करने के निर्देश संवेदक को दे दिए गए हैं। सड़क वर्तमान में गारंटी अवधि में है और इसकी मरम्मत संवेदक द्वारा ही कराई जाएगी।

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