- वैज्ञानिक नगरी के हाल
रावतभाटा. अणु नगरी रावतभाटा का नाम आता है तो यहां संचालित व निर्माणधीन परमाणु बिजलीघर की बहु इकाइयों से किसी महत्वपूर्ण शहर की कल्पना से मन रोमांचित हो जाता है। इसके अलावा यहां संचालित भारी पानी संयंत्र व देश के दूसरे निर्माणधीन न्यूक्लियर फ्यूल कॉम्प्लेक्स समेत चंबल नदी स्थित प्रदेश के सबसे बड़े राणा प्रताप सागर बांध की मौजूदगी इसकी ख्याति में चार चांद लगा देती है। जब बात रावतभाटा को सड़क मार्ग से जोडऩे की हो, तो वैश्विक ख्याति धरी रह जाती है। बदहाल सड़कों और दुर्गम रास्तों से होकर यहां पहुंचने की पीड़ा से आगंतुकों की धारणाएं क्षण में दूर कर देती है। शैक्षणिक नगरी कोटा से महज 50, झालावाड़ से 80 और जिला मुख्यालय चित्तौडग़ढ़ से 140 किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद रावतभाटा सही मायनों में टूटी खस्ताहाल सड़कों की वजह से तरक्की की दौड़ में पीछे है। रावतभाटा में परमाणु ऊर्जा संयंत्र, भारी पानी व एनएफसी संयंत्रों की मौजूदगी के चलते आधा दर्जन आवासीय कॉलोनी में बड़ी संख्या में विभाग के वैज्ञानिक अधिकारी व कर्मचारी निवासरत है। इन संयंत्रों में भविष्य में कभी आपात की स्थिति हो तो निकटतम बड़े शहर कोटा की राह नजर आती है। आपात की स्थिति से निबटने के लिए निर्मित कमेटी का अध्यक्ष कोटा सम्भागीय आयुक्त को बनाया है। लेकिन आपात की स्थिति में टूटी सड़क और दुर्गम रास्तों की वजह से कोटा-रावतभाटा के बीच महज 50 किलोमीटर की दूरी भी दूर की कौड़ी साबित होगी।
बाहर निकलते ही मंडराता काल
शहर के बाहर निकलते ही चारों ओर बदहाल सड़कों और दुर्गम रास्तों के चलते वाहन चालकों पर काल मंडराने लगता है। कोटा, झालावाड़, चित्तौडग़ढ़ जिले समेत मध्यप्रदेश से जुड़े रावतभाटा से बाहर निकलने की बात हो तो कोलीपुरा, एकलिंगपुरा, दीपपुरा व भैंसरोडगढ़ के पीरमंगर की दुर्गम घाटियां पार करनी होती है। विकट घुमावदार रास्तों पर टूटी सकरी सड़कों पर आमने सामने दो चौपहिया वाहन आ जाए तो एक वाहन को सड़क छोड़ नीचे उतारना पड़ता है। ऐसे में समय रहते निर्णय नहीं ले पाने पर वाहन चालकों को हादसे का शिकार होना पड़ता है।
मौत की नींद सो रहे लाल
बदहाल टूटी सड़कों से हो रहे हादसों में लोग जान गंवा रहे है। स्थिति यह है कि हर दूसरे हादसे में एक की मौत हो रही हैं। पिछले वर्ष कोटा मार्ग पर गड्डों से बचने के चक्कर में रावतभाटा के प्रतिभावान युवक की कार पेड़ से टकराई थी। जिसमें उसकी दर्दनाक मौत हो गई। पिछले महीने भैंसरोडगढ़ पुलिया के पास विकट घुमावदार मोड़ व संकरी सड़क की वजह से बाइकसवार युवा पुलिस कर्मी ट्रक की चपेट में आ गया था। जिससे उसकी मौत हो गई। वहीं ताजा हादसे में गत सोमवार देर रात को पीरमंगरा घाटी क्षेत्र में ट्रक पलटने से चालक की दर्दनाक मौत हो गई थी। जबकि गत सप्ताह दीपपुरा घाटे पर एक कार सुरक्षा दीवार के अभाव में खाई में झूल गई। गनीमत रही कि बड़ा हादसा टल गया।