अभिनय की दुनिया में कंट्रोवर्सी कभी भी हुनर की जगह नहीं ले सकती। कोई विवाद खड़ा कर आप रातों-रात मशहूर तो हो सकते हो।
कोटा . अभिनय की दुनिया में कंट्रोवर्सी कभी भी हुनर की जगह नहीं ले सकती। कोई विवाद खड़ा कर आप रातों-रात मशहूर तो हो सकते हो, लेकिन हुनर की बदौलत ही एक कलाकार मुम्बई में बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है। ये बेबाक राय 'राजस्थान पत्रिका से खास मुलाकात में जाहिर की ससुराल सिमर का, स्वरागिनी, संतोषी मां, हमारी बहू रजनीकांत , बकुला बुआ का भूत और सिद्धि विनायक समेत दर्जन भर टीवी सीरियल में अहम् किरदार निभा चुकी कोटा की बेटी लकी मेहता ने।
Read More...तो इस तरह आप घर बैठे बन सकते हैं लखपति, जल्दी कीजिए कहीं मौका हाथ से न निकल जाए
पढ़ाई के दौरान मिले मिस मोदी कॉलेज और मिस जेडीबी कॉलेज जैसे खिताबों ने कोटा की इस बेटी की आंखों में मुम्बई पर छाने का ख्वाब जगा दिया। फैशन डिजाइनर बनने मुम्बई गई, लेकिन सपनों के शहर पहुंचते ही ख्वाब जाग उठा। थियेटर से जुड़कर एक्टिंग सीखना शुरू किया। एक वर्कशाप में उनका हुनर देख हैट्स ऑफ प्रोडक्शन हाउस ने उन्हें अपने अंतरराष्ट्रीय विज्ञापन के लिए चुन लिया। इस विज्ञापन को देखकर ही उन्हें 'ससुराल सिमर का सीरियल में 15 दिन काम ? करने का मौका मिला। इसके बाद लकी ने पीछे मुडकर नहीं देखा। 'स्वरागिनी, 'संतोषी मां और 'हमारी बहू रजनीकांत जैसे दर्जन भर सीरियल में किरदार निभाया।
छा गईं 'नियति देवी
स्क्रिप्ट राइटर आतिश कपाडिय़ा अपने सीरियल 'बकुला बुआ का भूत का भविष्य तय करने वाली नियति देवी के किरदार के लिए नए चेहरे की तलाश में थे। ऑडिशन में लकी ने जैसे शुद्ध हिंदी में धार्मिक डायलॉग की डिलेवरी की, वे उन्हें ना नहीं कर सके। लकी बताती हैं कि प्रोड्यूसर प्रशांत भट्ट ने अपने सीरियल सिद्धि विनायक के लिए जब उन्हें चुना तो को-प्रोड्यूसर संजय मेमाने और दौलत रावत की टीम ने उनकी अभिनय प्रतिभा को जमकर मांजा। लकी कहती हैं, कोटा के कलाकारों में हुनर भरा है, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिल पाता। इसलिए वे अपना प्रोडक्शन हाउस खोलने की तैयारी में जुटी हैं। वे कहती हैं कि कोटा इतना खूबसूरत शहर है कि यहां पूरे सीरियल की शूटिंग की जा सकती है और वह अपने सीरियल की शूटिंग इन्हीं लोकेशन पर करेंगी, ताकि कोटा को रुपहले पर्दे पर नई पहचान मिल सके।
यहां जो डर गया वो बाहर...
लकी कहती हैं कि फिल्म और सीरियल इंडस्ट्रीज में कई मर्तबा ऐसे मौके आते हैं जब आप खुद को अकेला पाते हैं, जो डर जाता है, वह बाहर हो जाता है। रुपहली दुनिया की चकाचौंध ने जब उन्हें डराया तो मां रेनू और पिता दुष्यंत ने उन्हें उबारा। इंडस्ट्रीज में टिके रहना है तो डर और अकड़ खत्म करके आगे बढऩा होगा।