
कोटा. बात-बात पर 'मर्दानगी' की ठसक दिखा महिलाओं को पीछे धकेलने वाले 'मर्द' फैमिली प्लानिंग का जिक्र छिड़ते ही भाग खड़े होते हैं। स्वास्थ्य विभाग को पूरे साल जिले भर में कोशिशें करने के बाद भी सिर्फ 37 'मर्द' ही मिले। मोर्चे पर महिलाओं ने न सिर्फ अकेले लड़ाई लड़ी, बल्कि 31 जिलों को पीछे धकेल सबसे ज्यादा फैमिली प्लानिंग कराने वाले प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े जिले का अवार्ड भी झटक लाईं। छोटा परिवार खुशहाल परिवार का नारा तो हर कोई लगाता है, लेकिन जब बात अमल करने की आती है तो मर्द मैदान ही छोड़ जाते हैं। परिवार सीमित रखने के
लिए वित्त वर्ष 2017-18 में कोटा जिले में कुल 6954 नसबंदियां हुईं। इसमें सिर्फ 0.5 फीसदी ऑपरेशन ही मर्दों ने करवाए। जबकि 99.5फीसदी ऑपरेशन कराने वाली महिलाएं निकलीं।
ऐसी हैं भ्रांतियां
डिप्टी सीएमएचओ डॉ. गिरधर गुप्ता बताते हैं कि जैसे ही किसी दंपती से परिवार नियोजन की बात की जाती है, मर्दों की 'मर्दानगी' आड़े आ जाती है। पुरुषों में आज भी भ्रांति है कि नसबंदी से उनमें शारीरिक कमजोरी आ जाएगी। दूसरी बड़ी वजह पुरुषों को लगता है कि यदि उन्हें कुछ हो गया तो परिवार कैसे चलेगा? परिवार की खुशहाली और पति की सुरक्षा का मसला आते ही महिलाएं सेक्रिफाइज को तैयार हो जाती हैं।
महिलाओं ने दिलाया सम्मान
महिलाओं की 'मर्दानगी' की वजह से कोटा जिला नसबंदी के मामले में पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया। इस उपलब्धि के लिए विश्व जनसंख्या दिवस पर बुधवार को जयपुर में 12 लाख रुपए की पुरस्कार राशि और सम्मान कोटा को प्रदान किया जाएगा। इसे लेने जिला कलक्टर गौरव गोयल, सीएमएचओ डॉ. आरके लवानियां और डीसीएमएचओ जयपुर जा रहे हैं।
मर्दों को ज्यादा 'प्रोत्साहन'
1400 रुपए : महिलाओं को नसबंदी कराने पर
2200 रुपए : महिलाओं को डिलेवरी के तुरंत बाद नसबंदी पर
2000 रुपए : पुरुषों को कभी भी नसबंदी कराने पर
कोटा में नसबंदी ट्रेंड
60 फीसदी : दो बच्चों पर
30 फीसदी : तीन बच्चों पर
10 फीसदी : चार या उससे ज्यादा
23 पुरुषों ने ही कराई दो बच्चों के बाद नसबंदी
3005 महिलाओं ने कराई दो बच्चों पर नसबंदी
14 पुरुषों ने तीन बच्चों के बाद कराई नसबंदी
118 महिलाओं ने डिलेवरी होते ही कराई नसबंदी
6917 महिलाओं ने सालभर में कराई नसबंदी
57पुरुष ही आए पूरे साल में नसबंदी कराने
3629 महिलाओं ने लगवाई पीपीआईयूसीडी