कोटा

किसानों का रूठा भाग्य सोना उगलने वाली जमीन हुई बंजर

किसान की फसल नहीं होने से उसकी रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी नहीं हो रही। किसान का कर्ज बढ़ता ही जा रहा है।
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Updated: 16 Apr 2018, 2:56 PM IST
Water Crisis

सांगोद विधानसभा की ग्राम पंचायत चारचौमा, भाण्डाहेड़ा, रेलगांव व कुराड़ पंचायतों की भूमि कभी खेत से सोना उगलती थी। पानी पर्याप्त रहा, तब तक किसान खुशहाल रहा। धीरे-धीरे पानी कम होता गया तो किसानों का भाग्य भी रूठता गया।
अब गांव के ये हालात हैं कि किसान की फसल नहीं होने से उसकी रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी नहीं हो रही। किसान का कर्ज बढ़ता ही जा रहा है। लोगों ने कर्ज के चलते गांव छोड़ दिए। शहर में आकर मजदूरी कर रहे हैं। समस्या का समाधान शीघ्र नहीं हुआ तो लोगों का रूख तेजी से शहर की ओर होगा।

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अब नहीं हटेंगे पीछे
संघर्ष समिति के अध्यक्ष बजरंग लाल यादव ने कहा कि लिफ्ट सिंचाई परियोजना की स्वीकृति मिलने तक आंदोलन का मन बना चुके किसान किसी भी सूरत में पीछे हटने वाले नहीं हैं।

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खंडहर हो गए मकान
चार पंचायतों के 20 गांव के करीब 200 से अधिक किसान गांव छोड़ चुके हैं। एक-एक गांव से करीब 20 से 25 परिवार नए रोजगार की तलाश में शहर की ओर रुख कर गए। गांव में किसानों के मकान खंडहर होते जा रहे हैं।

कोई 5 साल पहले की पानी के अभाव में गांव से पलायन कर गया तो किसी ने कुछ समय पहले ही अपने बच्चों सहित गांव को छोड़ दिया। टहला गांव का रामभरोस पिछले पांच साल से अपना गांव छोड़ चुका है। बैंक का कर्ज अधिक होने से बैंककर्मी तकाजा करने घर आते थे। इससे परेशान होकर वह रात को ही पूरे परिवार सहित चला गया और मजदूरी कर रहा है।

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बेटा भेजता है घर खर्च
पानी के अभाव में लक्ष्मीनारायण का परिवार भी गांव छोड़ गया। घर की रखवाली के लिए वह घर पर अकेला ही रहता है। बेटा शहर में मजदूरी कर रहा है। पोते भी दुकानों पर काम कर रहे हैं। वहां से पैसे आ जाते हैं तो खर्च चल जाता है। टहला गांव की मंजू अपने बच्चे मनीष व अनिल के साथ मजदूरी करने जाती है। पति की मौत के बाद हालात विकट हो गए। उनके 7 बीघा खेत है, लेकिन फसल नहीं होने से परेशानी आ रही है।

इसके साथ ही गांव का बनवारी कोटा में ड्राइवरी कर रहा है। वहां से कुछ कमा लेता है तो गांव दे जाता है। पहले बनवारी खेती करता था, उसके 8 बीघा जमीन थी। ऐसे ही न जाने कितने परिवारों का दर्द है, जो पानी के अभाव में मजदूरी करने को मजबूर हो रहे हैं।

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