
कोटा .
सांगोद विधानसभा क्षेत्र के चारचौमा, भांडाहेड़ा, रेलगांव, कुराड़ी ग्राम पंचायतों के दो दर्जन से अधिक गांवों का भूजल स्तर गहराने से हजारों बीघा जमीन पड़त रह गई। गर्मी शुरू होने के साथ ही क्षेत्र के बाशिंदों व मवेशियों के सामने पेयजल संकट खड़ा हो गया है।
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पत्रिका टीम ने क्षेत्र के बम्बोली गांव पहुंचकर वहां के हालातों का जायजा लिया तो गांव में इक्के दुक्के पुरुष ही नजर आए। कारण पता किया तो पता चला कि इस साल खेती नहीं हुई तो पुरुष वर्ग सुबह उठते ही शहर में मजदूरी के लिए निकल जाते हैं और शाम को ही घर लौटते हैं। महिलाएं दिनभर घर-गृहस्थी के कामकाज करती हैं।
गांव की संतोष व कैला देवी का कहना था कि क्षेत्र में लिफ्ट परियोजना की बरसों से मांग कर रहे हैं। कई नेता आए और गए, लेकिन किसी ने भी सुनवाई नहीं की। घर-बार, जमीन-जायदाद सबकुछ यहीं है, इन्हें छोड़ भी तो नहीं सकते। महिलाओं ने आक्रोश भरे लहजे में कहा कि हमारे आदमी बोलने नहीं देते। नहीं तो हम नेताओं को गांव में घुसने भी नहीं दें। यदि इस बार कोई नेता वोट मांगने आया तो उसका निकला तक मुश्किल कर देंगे।
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विकट हालात
महिलाएं चम्बा बाई, ललिता, मनभर, सुमित्रा, श्यामा बाई आदि ने बताया कि क्षेत्र में हमेशा से ही पानी की बड़ी समस्या है। किसी साल अच्छी बरसात हो जाती है तो ताल तलैया भरने से खेतों में फसल हो जाती है।
तीन चार साल पहले कृषि विभाग की खेत तलाई योजना के तहत खेतों में डिग्गियां भी खुदवाई, लेकिन गत वर्ष भरपूर बरसात नहीं होने से खेत तलाई का पानी अक्टूबर माह में ही सूख गया। बोरिंग भी जवाब दे गए। ऐसें में हजारों बीघा जमीन पड़त रह गई। मई-जून के माह में क्या हालात होंगे। पानी के बिना कैसे खाना बनेगा, नहाना धोना कैसे होगा। मवेशियों को क्या पिलाएंगे।