
कोटा . सरकारी सिस्टम के चलते किसानों को समर्थन मूल्य पर सरसों, चना के साथ-साथ अब गेहूं बेचने में भी परेशानी उठानी पड़ रही है। टोकन में निर्धारित तिथि पर खरीद केंद्र पर उपज पहुंचाने के लिए किसानों को न चाहते हुए भी जान जोखिम में डालनी पड़ रही हैं। इसके बावजूद उपज खरीद केंद्र पर नहीं तुल पा रही। ऐसे में उन्हें 1735 रुपए प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य से भी 150-200 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान उठाकर 1500-1525 रुपए के भाव में मंडियों में गेहूं बेचना पड़ रहा है।
केशवरायपाटन के बूडिय़ा गांव निवासी दानमल मीणा ने बताया कि उन्होंने भामाशाह मंडी खरीद केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए ई-मित्र पर पंजीयन कराया। 31 मार्च को गेहूं तुलवाने की तारीख मिली। फसल अभी पकी भी नहीं थी, लेकिन तारीख पर उपज तुलाने के लिए रात में कम्बाइंडर मशीन से उपज तैयार कराई।
अंधेरा होने के कारण हाथ मशीन में आ गया। लेकिन उपज मंडी में लानी थी, ऐसे में कपड़ा फाड़ कर घाव को बांध लिया और रात में ही उपज ट्रैक्टर-ट्रॉली में भर कर भामाशाह मंडी स्थित खरीद केंद्र पर ले आया। सुबह दस बजे जब खरीद केंद्र प्रभारी को पंजीयन रसीद, खेत की नकल, गिरदावरी, बैंक पास बुक, आधार कार्ड सौंपे तो उन्होंने दस्तावेज बूंदी जिले के होने का हवाला देते हुए उपज तोलने से मना कर अपने क्षेत्र के खरीद केंद्र पर जाने को कहा। ऐसे में किसान ने खुली नीलामी में 1525 रुपए प्रति क्विंटल में गेहूं बेचना पड़ा।
किसान को स्वतंत्रता मिले
भामाशाह मंडी लाडपुरा, कनवास तहसील क्षेत्र के किसानों के लिए अधिकृत नहीं है। यहां पूरे हाड़ौती के किसान उपज बेचने आते हैं। सरकार को चाहिए कि किसानों को क्षेत्रवाद में नहीं बांटे। सभी किसानों को अपनी उपज किसी भी खरीद केंद्र पर बेचने की स्वतंत्रता दी जाए। - अविनाश राठी, अध्यक्ष कोटा ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन
सिस्टम के मुताबिक ही खरीद
एफसीआई क्षेत्र प्रबंधक पवन बोहत्रा ने बताया कि सरकार ने जो सिस्टम बना रखा है उसी के अनुरूप हम खरीद करेंगे। किसान जानबूझ कर गलती कर रहा है। जब उसके पास ही खरीद केंद्र है तो कोटा क्यों माल ला रहा है। पास के खरीद केंद्र पर क्यों नहीं बेच रहा।