कोटा

कोटा पुलिस ने गैंगरेप में लगा दी एफआर, जज की डिप्टी पर तल्ख टिप्पणी, कहा- जांच में बरती गंभीर लापरवाही

युवती से सामूहिक बलात्कार जैसे गंभीर मामले में पुलिस उपाधीक्षक ने जांच में कमियां छोड़ते हुए मामले में एफआर लगा दी। न्यायालय ने इसे गंभीर मानते हुए पुलिस की लापरवाही करार दिया।
2 min read
• •
May 05, 2019
this-came-a-new-turn-in-devendra-chaurasia-massacre-now-it-will-be-th
this-came-a-new-turn-in-devendra-chaurasia-massacre-now-it-will-be-th

कोटा. युवती से सामूहिक बलात्कार जैसे गंभीर मामले में पुलिस उपाधीक्षक ने जांच में कमियां छोड़ते हुए मामले में एफआर लगा दी। न्यायालय ने इसे गंभीर मानते हुए तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक की कर्तव्य पालन के प्रति उपेक्षा व लापरवाही करार दिया। न्यायालय ने तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक भंवरसिंह हाड़ा की जांच पर तल्ख टिप्पणी करते हुए उन्हें व तत्कालीन थानाधिकारी दोरावरसिंह भाटी को 15 दिवस में न्यायालय में व्यक्तिगत पेश होकर लिखित स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए। इसके अलावा दोनों आरोपियों के गिरफ्तारी वारंट जारी कर 14 मई को पत्रावली पेश करने के आदेश दिए।

Read More: बच्चे को जहरीले कीड़े ने काटा, पिता डॉक्टर से पहले ले गया तेजाजी थानक, झाड़-फूंक में टूट गया इकलौते बेटे का दम

पीडि़ता की मां ने किशोरपुरा थाने में 1 मार्च 2016 को दर्ज करवाई रिपोर्ट में बताया कि किशोरपुरा थाना क्षेत्र के मोहन टॉकिज के पास 29 फरवरी 2016 को उसकी पुत्री गुब्बारे बेच रही थी। इस दौरान चाकू की नोंक पर बूंदी जिले के डाबी थाना क्षेत्र के जवाहर सागर डेम निवासी दीपक बुनकर व आरकेपुरम थाना क्षेत्र के नयागांव निवासी अंकित योगी उसका अपहरण कर लोडिंग टेम्पो में ले गया। आरोपियों ने युवती से कुछ दूरी पर ले जाकर सामूहिक बलात्कार किया। मामला किशोरपुरा थाने में दर्ज हुआ। इसकी जांच तत्कालीन पुलिस उप अधीक्षक भंवरसिंह हाड़ा व तत्कालीन थानाधिकारी द्वारा की गई। इसमें जांच के बाद उन्होंने अंतिम प्रतिवेदन (एफआर) नकारात्मक बताते हुए न्यायालय में पेश कर दी। इस पर फरियादी की ओर से एडवोकेट गोविन्द सिंह हाड़ा ने न्यायालय में प्रोटेस्ट पीटिशन दायर की।

पुलिस ने दिए थे ये तर्क
न्यायालय में प्रस्तुत की एफआर में पुलिस द्वारा प्रकरण में निकट चल रहे शादी समारोह में गश्त कर रहे कांस्टेबलों को घटना की जानकारी नहीं होने, आरोपियों की मोबाइल लोकेशन के आधार पर उनके घटनास्थल पर नहीं होने, आरोपियों के पक्ष में गवाही, पीडि़ता से बलात्कार व बदन पर चोट नहीं होने को आधार मानते हुए एफआर लगाने का तर्क दिया गया। इसे न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया।

Updated on:
05 May 2019 08:42 am
Published on:
05 May 2019 08:42 am