
कोटा. पत्रिका डॉट कॉम की योग विशेष सीरीज के तहत योगा इंस्ट्रक्टर प्रियंका गौतम से जानिए योग का महत्व और इन्हें करने की विधि
सेतुबंधासन
सेतुबंधासन का नाम दो शब्दों पर रखा गया है: "सेतु" और "बंध "। सेतु का मतलब होता है पुल और बंध का मतलब बांधना । इस आसन में आप अपने शरीर को एक सेतु की मुद्रा में बाँध कर या रोक कर रखते हैं, इस लिए नाम रखा गया "सेतुबंधासन"।
सेतुबंधासन करने का तरीका
अपनी पीठ के बल फ्लैट लेट जाए । अपने बाज़ुओं को धड़ के साथ रख लें। टांगो को मोड़ कर पैरों को अपने कूल्हों के करीब ले आयें। जितना करीब हो सके उतना लायें। हाथों पर वज़न डाल कर धीरे धीरे कूल्हों को उपर उठायें। ऐसा करते वक़्त श्वास अंदर लें। पैरों को मज़बूती से टिका कर रखें। पीठ जितनी मोडी जाए, उतनी ही मोड़ें। अपनी क्षमता से ज़्यादा ना करें - अभ्यास के साथ धीरे धीरे आप ज़्यादा कर सकते हैं। अब दोनो हाथों को जोड़ लें। आपके लिए मुमकिन हो तो दृष्टि नाक पर केंद्रित करें वरना छत की ओर देख सकते हैं। इस मुद्रा में 5-10 सेकेंड रहें, फिर कूल्हों को वापिस ज़मीन पर टिकायं। नीचे आते वक़्त श्वास छोड़ें। हो सके तो 2 से 3 बार दौहरायें। अगर इतना ना हो तो जितना हो सके उतना करें। आसान से बाहर निकालने के लिए विपरीत क्रम में स्टेप्स करें।
सेतुबंधासन के कुछ फायदे
सेतुबंधासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है। छाती, गर्दन, और रीढ़ की हड्डी में खिचाव लाता है। मस्तिष्क को शांत करता है और तनाव और हल्के अवसाद को कम करने में मदद करता है सेतुबंधासन। पाचन में सुधार लाता है। सेतुबंधासन पेट के अंगों, फेफड़ों और थायरॉयड को उत्तेजित करता है। टाँगों को फिर से जीवंत बनाता है। रजोनिवृत्ति के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है सेतुबंधासन। मासिक धर्म में होने वाली परेशानी से राहत देता है। सेतुबंधासन अस्थमा (दमा), हाई बीपी, ऑस्टियोपोरोसिस और साइनसाइटिस के लिए चिकित्सीय। चिंता, थकान, पीठ दर्द, सिरदर्द, और अनिद्रा कम कर देता है।
उष्ट्रासन योग
उष्ट्रासन दो शब्द मिलकर बना है। ‘उष्ट्र’ का अर्थ ऊंट होता है। इस मुद्रा में शरीर ऊंट के समान लगता है इसीलिए इसको इस नाम से पुकारा जाता है। स्वस्थ लाभ के हिसाब से उष्ट्रासन बैठ कर करने वाले आसन में एक महत्वपूर्ण योगाभ्यास है।
उष्ट्रासन योग करने की विधि
उष्ट्रासन करना बहुत आसान है। यहां पर बहुत सरल तरीके से इसके विधि को बताया जा रहा है।
सबसे पहले आप फर्श पर घुटनों के बल बैठ जाएं या आप वज्रासन में बैठे।
ध्यान रहे जांघों तथा पैरों को एक साथ रखें, पंजे पीछे की ओर हों तथा फर्श पर जमे हों।
घुटनों तथा पैरों के बीच करीब एक फुट की दूरी रखें।
अब आप अपने घुटनों पर खड़े हो जाएं।
सांस लेते हुए पीछे की ओर झुकें और अब दाईं हथेली को दाईं एड़ी पर तथा बाईं हथेली को बाईं एड़ी पर रखें।
ध्यान रहे कि पीछे झुकते समय गर्दन को झटका न लगे।
अंतिम मुद्रा में जांघें फर्श से समकोण बनाती हुई होंगी और सिर पीछे की ओर झुका होगा।
शरीर का वजन बांहों तथा पांवों पर समान रूप से होना चाहिए।
धीरे धीरे सांस ले और धीरे धीरे सांस छोड़े।
जहाँ तक हो सके अपने हिसाब से मुद्रा को मेन्टेन करें।
और फिर लंबी गहरी सांस छोड़ते अपनी आरंभिक अवस्था में आएं।
यह एक चक्र हुआ।
इस तरह से आप इसको पांच से सात बार कर सकते हैं।
उष्ट्रासन योग के लाभ
उष्ट्रासन योग के बहुत सारे लाभ है। यहां पर इसके कुछ महत्वपूर्ण फायदे के बारे में बताया गया है। आप इस ज़्यदा से ज़्यदा फायदा उठा सकते हैं अगर इसको ऊपर बताए गए विधि के हिसाब से जाए।
कटी उत्तानासन
1 . शवासन में लेट कर दोनों पैरों को मोड़कर रखकें। दोनों हाथ दोनों ओर पाश्व मैं फैलाकर रखें।
2 श्वास अन्दर भरते हुए पीठ को ऊपर की ओर खींचे। नितम्ब तथा छोड़ते हुए पीठ को निचे भूमि पर दबाकर पूरा सीधा कर दें। इस प्रकार यह अभ्यास 8 -10 बार करें।
लाभ: स्लिपडिस्क(SLEEPDISC), सायटिका (SIYATIKA) एवं कमर दर्द मैं विशेष उपयोगी है।
भुजंगासन
भुजंगासन को कोबरा पोज़ भी कहा जाता है क्योंकि इसमें शरीर के अगले भाग को कोबरा के फन के तरह उठाया जाता है। भुजंगासन की जितनी भी फायदे गिनाए जाएं कम है।
भुजंगासन कैसे करें
आप सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं।
अब अपने हथेली को कंधे के सीध में लाएं।
दोनों पैरों के बीच की दुरी को कम करें और पैरों को सीधा एवं तना हुआ रखें।
अब साँस लेते हुए शरीर के अगले भाग को नाभि तक उठाएं।
ध्यान रहे की कमर पर ज़्यदा खिंचाव न आये।
अपने हिसाब से इस आसान को बनाए रखें।
योगाभ्यास को धारण करते समय धीरे धीरे स्वाँस लें और धीरे धीरे स्वाँस छोड़े।
जब अपनी पहली अवस्था में आना हो तो गहरी स्वाँस छोडते हुए प्रारम्भिक अवस्था में आएं।
इस तरह से एक चक्र पूरा हुआ।
शुरुवाती दौर में इसे 3 से 4 बार करें।
धीरे धीरे योग का धारण समय एवं चक्र की नंबर को बढ़ाएं।
भुजंगासन के लाभ
भुजंगासन पैंक्रियाज को सक्रिय करता है और सही मात्रा में इन्सुलिन के बनने में मदद करता है। यह शरीर को सुडौल एवं खूबसूरत बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। यह योगाभ्यास सम्पूर्ण शरीर में खिंचाव ले कर आता है और यही नहीं शरीर के अतरिक्त चर्बी को पिघालने में बहुत मददगार है।
नियमित रूप से इस योगभ्यास को करने से बहुत सारी स्त्री रोगों जैसे सिफिलिस, गोनोरिया इत्यादि से बच सकते हैं।
मर्कटासन
मर्कट का मतलब बंदर है और यह आसन एक बंदर जैसा दिखता है।
मर्कटासन कैसे करें
पैरों को सीधा करके अपनी पीठ पर सीधे लेट जाओ।
घुटने ऊपर करके पैरों को मोड़ लें | दोनों हाथ कंधों के साथ सीधी रेखा में फैला फर्श पर रखें।
सांस अंदर लें | सिर को दांयी ओर और अपने घुटनों को बांयी ओर मुडाईए | फर्श पर घुटनों को छूने की कोशिश करें। जहाँ तक संभव हो दांयी ओर देखो।
4 से 5 सेकंड के लिए इस स्थिति में रहते हैं।
सामान्य स्थिति में आने के लिए
अब साँस छोड़ते वापस शुरूवाली की स्थिति में आ जाएं |
अब दूसरे पक्ष के लिए यह आसन करें यानि इसे विपरीत दिशा में करें |
8 से10 बार के लिए इसे दोहराएँ।
लाभ
पीठ में दर्द और रीढ़ की हड्डी में विकृति के लिए बहुत मददगार है |
यह सर्विकल स्पॉन्डिलाइटिस और SLIP DISK में बहुत उपयोगी है।
यह पेट में दर्द, गैस्ट्रिक समस्याओं, कब्ज और अपच के इलाज के लिए मदद करता है।
रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है और स्नायु संबंधी विकार ठीक हो जाते है।
यह गुर्दे, अग्न्याशय, प्लीहा और यकृत के रूप में आंतरिक अंगों को सक्रिय करता है।
मधुमेह और अस्थमा के मरीजों को लाभान्वित किया जा सकता है।
यह कूल्हे और जोड़ों के दर्द के लिए फायदेमंद है।
यह थकान, उनींदापन और तनाव से राहत दिलाता है। मन और शरीर को आराम करने में बहुत प्रभावी।
यह उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए बोहोत फ़ायदेमंद है क्योंकि इससे श्वास और हृदय गति धीमी/शांत हो जाती है।