
नाहरगढ़. पिछले साल मानसून के दौरान बरनी नदी के रौद्र रूप ने नाहरगढ़ को टापू में तब्दील कर दिया था। अब जब मानसून आ गया है तो सवाल यह उठ रहा है कि क्या बरनी नदी की पुलिया इस बार फिर से मुसीबत का सबब बनेगी। फिलहाल पुलिया पर चल रहे निर्माण कार्य की रफ्तार को देखकर ग्रामीणों में भारी रोष है। प्रशासन ने इस पुलिया के पुर्ननिर्माण के बजाय फिलहाल केवल रिपेयरिंग का कार्य शुरू किया है। पुर्ननिर्माण की बात बरसात के बाद के लिए टाली जा रही है। सवाल यह है कि क्या यह कच्ची मरम्मत, नदी के उस वेग को थाम पाएगी, जिसने पिछले साल पूरी संरचना को ही बहा दिया था।
रुक-रुक कर चल रहा काम
ग्रामीणों का कहना है कि कार्य की सुस्त चाल ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पुलिया का रास्ता अभी से ही बाधित है, जिससे आवाजाही में भारी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि बरसात का दौर शुरू हुआ और पुलिया पूरी तरह तैयार नहीं हुई, तो क्या होगा? क्या यह अधूरी मरम्मत बरसात की पहली मार झेलने में सक्षम है।
प्रशासन की चुप्पी, ग्रामीणों की आशंका
स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि बाद में निर्माणका वादा उस समय बेमानी हो जाएगा, जब पानी के बहाव में यह सड़क दोबारा बह जाएगी। लोग अब भी डरे हुए हैं कि कहीं पिछले साल की तरह नाहरगढ़ फिर से टापू न हो जाए।