जानिये विधानसभा- ये है कुशीनगर जिले की खड्डा विधानसभा सीट

सरकार बनाने वाली पार्टी के प्रत्याशी को जिताया , पर नहीं हुआ विकास

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Sep 30, 2016
vidhan sabha
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अवधेश मल्ल
कुशीनगर. वर्ष 1967 में दीपक चुनाव चिह्न पर मुहर लगाकर जनसंघ के प्रत्याशी श्रीनारायण उर्फ भुलई भाई को लखनऊ भेजने वाली नौरंगिया विधानसभा सीट का नाम 2012 में बदलकर खड्डा कर दिया गया। एक - दो अपवादों को छोड़ दिया जाय तो अधिकतर मर्तवा यहां की जनता ने सरकार बनाने वाले दल के प्रत्याशी को ही विजयी बनाया है। इसके बावजूद यह विधानसभा क्षेत्र पिछड़ा का पिछड़ा ही रह गया। एक बड़ी आबादी आज भी सड़क तक से महरूम है।
ये है विधानसभा का राजनीतिक इतिहास
वर्ष 1980 में हुए विधानसभा के चुनाव खड्डा विधानसभा की जनता ने कांग्रेस के प्रत्याशी महेश प्रसाद को 48.28 प्रतिशत मत देकर विधानसभा में भेजा था। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी । इससे पहले 1977 में जनता लहर में जनता पार्टी के उम्मीदवार श्रीनारायण उर्फ भुलई भाई को 58.15 प्रतिशत के बंपर मतों से दोबारा विधानसभा में भेजा था। भुलई भाई अपनी सादगी और भोजपुरी बोलने के कारण विधानसभा में चर्चित रहे। भुलई भाई से पूर्व बैजनाथ प्रसाद, दशरथ प्रसाद और महाबीर प्रसाद और कृष्णानंद भारती इस क्षेत्र की रहनुमाई कर चुके हैं। 1985 में खड्डा के मतदाताओं ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे बैजनाथ प्रसाद को 51.54 प्रतिशत मत देकर दूसरी बार अपना प्रतिनिधि चुन लिया। इसबार भी प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी। 1989 में इस क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार पूर्णमासी देहाती मछली चुनाव चिह्न से विजय का सेहरा अपने सिर पर बांधने में सफल रहे।
प्रदेश में सपा की सरकार बनी और वे सपा के खेमें में खड़े रहे।


1991 के रामलहर में भाजपा ने अपनी खोई सीट हासिल कर ली। उसके उम्मीदवार दीपलाल भारती 41.45 प्रतिशत मत पाकर विजयी रहे। 1993 में हुए विधानसभा के चुनाव में सपा के उम्मीदवार के रूप में पूर्णमासी देहाती विजयी रहे। प्रदेश में सपा - बसपा के गठजोड़ की सरकार बनी थी। 1996 में मतदाताओं ने 52286 मत देकर भाजपा के उम्मीदवार दीपलाल भारती को प्रदेश विधानसभा में भेज दिया। 2002 में सपा के उम्मीदवार पूर्णमासी देहाती 39845मत पाकर विजयी रहे तो 2007 के चुनाव में 38275 मत बटोर कर भाजपा के उम्मीदवार शंभू चौधरी प्रदेश विधानसभा में पहुंच गए। वर्ष 2012 में हुए विधानसभा के चुनाव में करीब ढाई दशक बाद कांग्रेस ने इस सीट पर कब्जा जमा लिया। 37260 मत पाकर कांग्रेस प्रत्याशी विजयी रहे। हालांकि विजय दूबे अभी कुछ दिन पहले कांग्रेस का साथ छोड़ फिर से भाजपा का दामन थान लिया है।
प्रदेश के अति पिछड़े इलाकों में माना जाता है यह क्षेत्र
अधिकतर मर्तवा सरकार बनाने वाली पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में मतदान देने के बाद भी इस विधानसभा क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हो सका है। उच्च व तकनीकी शिक्षा की बात तो दूर दियारा क्षेत्र के लोग आज भी आवागमन के लिए पुल और सड़क तक से महरूम हैं। बरसात के दिनों में एक दर्जन से ज्यादा गांवों का जिले के शेष हिस्से से संपर्क कट जाता है जबकि मरिचहवा नरसंहार के बाद गांव में आए तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने इलाके में विकास कराने की बात कही थी। दियारा क्षेत्र के अलावा बैरागीपट्टी और छितौनी ग्रामसभा के एक पूरवे का रास्ता बरसात के दिनों में बंद हो जाता है। कुल मिलाकर यह विधानसभा क्षेत्र जिले ही नहीं प्रदेश के अति पिछड़े इलाकों में से एक है।

क्या कहते ताजा हालात
आने वाले 2017 चुनाव के लिए सभी दल एक दूसरे दलों के प्रत्याशी घोषित करने पर नजर बनाये हुए है। हालांकि अभी तक सिर्फ सपा ने नथुनी कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है जबकि बसपा ने विजय कुशवाहा को इस विधानसभा सीट पर प्रभारी प्रत्याशी बनाया है इसके अलावा अभी तक किसी भी दल ने इस सीट पर उम्मीदवार नहीं बनाया है जिससे ये कह पाना मुश्किल है कि यहां किस दल की पकड़ मजबूत है।

Published on:
30 Sept 2016 11:25 am