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US-Iran Deal: अमेरिका और ईरान में हुआ समझौता, डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियन ने 14 सूत्रीय MoU पर किए हस्ताक्षर

US-Iran MoU: व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

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भारत

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Ashib Khan

Jun 18, 2026

US-Iran Deal

अमेरिका और ईरान के बीच हुई समझौता (Photo-IANS)

US-Iran Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से ईरान के साथ हुए 14 सूत्रीय समझौते ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने फ्रांस से रवाना होते समय इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। मैंने वर्साय में इस पर साइन किए हैं। 

वहीं ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी इस पर हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।

इससे पहले अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस (Axios) ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ वर्साय पैलेस में आयोजित रात्रिभोज के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

वहीं व्हाइट हाउस के अधिकारी ने भी इस समझौते की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते की प्रति पर व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षर किए हैं।

ईरान ने भी किए हस्ताक्षर

वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन का मसौदा दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के साथ अंतिम रूप ले चुका है। अब इसकी वास्तविक परीक्षा इसके क्रियान्वयन में होगी।

हालांकि, शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित औपचारिक हस्ताक्षर समारोह को फिलहाल रद्द कर दिया गया है। इसके बावजूद समझौता प्रभावी हो चुका है।

ट्रंप ने दी चेतावनी

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस 300 अरब डॉलर के विकास कार्यक्रम में अमेरिकी सरकार का कोई प्रत्यक्ष धन नहीं होगा और ईरान को इसका लाभ तभी मिलेगा जब वह समझौते की शर्तों का पालन करेगा। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान समझौते का उल्लंघन करता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

इसके अलावा ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका वर्षों से फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को भी भविष्य में वापस करने पर विचार कर सकता है। उन्होंने कहा कि किसी समय हमें वह पैसा वापस करना पड़ सकता है। अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो दुनिया का कोई भी देश डॉलर पर भरोसा नहीं करेगा।