
Donald Trump:अमेरिका-ईरान समझौता(फोटो-IANS)
America-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते को लेकर जहां दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं अमेरिका के भीतर इस समझौते पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कई डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस करार पर कड़ी आपत्ति जताते हुए दावा किया है कि इससे ईरान को ज्यादा फायदा मिला है, जबकि अमेरिका को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। उनके अनुसार, आने वाले 48 घंटों के भीतर डील पर साइन हो सकती है।
अमेरिकी प्रशासन ने बुधवार को उस समझौता ज्ञापन (MoU) का आधिकारिक टेक्स्ट जारी किया, जिस पर दोनों देशों के बीच सप्ताह के अंत में सहमति बनी थी। तय कार्यक्रम के अनुसार इस समझौते पर शुक्रवार को औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके बाद 60 दिनों की एक अवधि शुरू होगी, जिसमें दोनों पक्ष व्यापक और स्थायी समझौते की शर्तों पर बातचीत करेंगे।
समझौते के सार्वजनिक होने के बाद अमेरिकी राजनीति में इसकी चर्चा तेज हो गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता चक शूमर ने इस समझौते को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि भविष्य में इसे अमेरिकी विदेश नीति की बड़ी असफलताओं में गिना जा सकता है। शूमर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति तक पहुंचने में उनकी नीतियों की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के सामने जरूरत से ज्यादा रियायतें दे दीं।
दूसरी ओर ईरान ने भी इस समझौते को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी शेयर की है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि समझौता ज्ञापन पर दोनों देशों की ओर से इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। ईरानी सरकारी मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि डाक्यूमेंट्स अब औपचारिक रूप से बन चुका है और आगे की प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेगी।
इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वह 60 दिनों की समयसीमा को अंतिम या कठोर सीमा नहीं मानते। पेरिस पहुंचने के बाद पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि यदि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो उन्हें निर्धारित अवधि से आगे बातचीत बढ़ने पर कोई आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने संकेत दिया कि उनके लिए कैलेंडर से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि दोनों देशों के बीच बातचीत रचनात्मक ढंग से आगे बढ़े। ट्रंप ने कहा कि जब तक दूसरा पक्ष समझौते की भावना के अनुरूप व्यवहार करता है, तब तक समयसीमा को लेकर वह ज्यादा चिंतित नहीं हैं।
Updated on:
18 Jun 2026 04:35 am
Published on:
18 Jun 2026 04:17 am
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