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US Iran Deal: अमेरिका ने जारी किया ईरान के साथ हुआ 14 सूत्रीय MoU, जानें क्या-क्या है डील में

US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित ऐतिहासिक समझौते में युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, तेल और बैंकिंग छूट, फंसी संपत्तियों की रिहाई तथा परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता शामिल है। अंतिम समझौते पर 60 दिनों के भीतर बातचीत होगी।

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भारत

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Anurag Animesh

Jun 18, 2026

Donald Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फोटो- ANI)

US Iran Deal Detail: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते का मसौदा सामने आया है। अमेरिकी प्रशासन ने इस समझौते का डिटेल जारी किया। अब इसकी फुल टेक्स्ट सामने आ गई है। जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। हालांकि अभी इस पर औपचारिक हस्ताक्षर नहीं हुए हैं, लेकिन समझौते में शामिल बिंदु संकेत देते हैं कि दोनों देश टकराव की जगह बातचीत का रास्ता अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस प्रस्तावित समझौते में कुल 14 प्रमुख बिंदु शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों पक्षों ने तत्काल प्रभाव से सैन्य कार्रवाई और संघर्ष रोकने पर सहमति जताई है। साथ ही भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी प्रकार की सैन्य धमकी या हमले से बचने का वादा भी किया गया है।

क्रमांकसमझौते का प्रमुख बिंदुविवरण
1युद्ध और फायरिंग पर रोकअमेरिका और ईरान ने सभी मोर्चों पर तत्काल युद्ध और गोलीबारी बंद करने पर सहमति जताई।
2हमला या धमकी नहींदोनों देश एक-दूसरे पर हमला नहीं करेंगे और किसी प्रकार की धमकी भी नहीं देंगे।
3संप्रभुता का सम्मानदोनों पक्ष एक-दूसरे की संप्रभुता और सीमाओं का सम्मान करेंगे।
460 दिनों में अंतिम समझौताअगले 60 दिनों के भीतर व्यापक और अंतिम समझौते पर बातचीत की जाएगी।
5नौसैनिक नाकाबंदी समाप्तअमेरिका 30 दिनों के भीतर ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करेगा और सैन्य बल हटाएगा।
6होर्मुज में सुरक्षित आवागमनईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित और निशुल्क आवाजाही सुनिश्चित करेगा।
7300 अरब डॉलर की विकास योजनाअमेरिका ईरान के आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर की योजना तैयार करेगा।
8प्रतिबंधों में राहतअमेरिका ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने या उनमें राहत देने के लिए तैयार है।
9परमाणु हथियार नहींईरान ने परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता जताई है।
10यथास्थिति बनाए रखनाअंतिम समझौते तक दोनों देश कोई नया सैन्य या प्रतिबंधात्मक कदम नहीं उठाएंगे।
11तेल और बैंकिंग में छूटअमेरिका ईरान को तेल निर्यात और बैंकिंग गतिविधियों में विशेष छूट देगा।
12फंसी संपत्तियों की रिहाईईरान की विदेशों में फंसी संपत्तियां और धनराशि जारी की जाएगी।
13निगरानी तंत्रसमझौते के क्रियान्वयन और पालन की निगरानी के लिए विशेष तंत्र बनाया जाएगा।
14संयुक्त राष्ट्र की मंजूरीअंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अनुमोदन दिलाया जाएगा।

60 दिनों में अंतिम समझौते की कोशिश


समझौते के तहत अमेरिका और ईरान अगले 60 दिनों के भीतर एक व्यापक और अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए बातचीत जारी रखेंगे। इस दौरान दोनों देश मौजूदा स्थिति को बनाए रखेंगे और ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे तनाव दोबारा बढ़े।

दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की संप्रभुता, सीमाओं और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने पर भी सहमति व्यक्त की है। इसे क्षेत्र में स्थिरता लाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

होर्मुज में फिर शुरू होगा जहाजों का आवागमन

वैश्विक ऊर्जा और व्यापार के लिए बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा पूरी तरह से खोलने की योजना भी इस समझौते का हिस्सा है। समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही तुरंत शुरू की जाएगी।

ईरान ने आश्वासन दिया है कि अगले 60 दिनों तक फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित और बिना किसी शुल्क के आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा समुद्री मार्गों में मौजूद तकनीकी और सुरक्षा संबंधी बाधाओं को दूर करने तथा समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाने का काम भी निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाएगा।

अमेरिका देगा आर्थिक राहत

समझौते का एक बड़ा हिस्सा आर्थिक सहयोग से जुड़ा हुआ है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह ईरान पर लगाए गए कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने को तैयार है। इसके साथ ही तेल निर्यात और बैंकिंग गतिविधियों से जुड़ी कुछ पाबंदियों में भी छूट देने की बात कही गई है।

अमेरिका ईरान के आर्थिक विकास और पुनर्निर्माण के लिए लगभग 300 अरब डॉलर की व्यापक योजना तैयार करेगा। इसके अलावा ईरान की विदेशों में फंसी संपत्तियों और वित्तीय संसाधनों को जारी करने पर भी सहमति बनी है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

परमाणु कार्यक्रम पर भी बनी सहमति


समझौते में परमाणु मुद्दा भी शामिल है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। वहीं, दोनों देश आगे की वार्ताओं में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े तकनीकी और निगरानी संबंधी पहलुओं पर चर्चा करेंगे।

लेबनान का भी जिक्र

समझौते में लेबनान की स्थिति को भी शामिल किया गया है। डॉक्यूमेंट के अनुसार, दोनों देश और उनके सहयोगी विशेष रूप से लेबनान समेत विभिन्न क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियों को समाप्त करने की दिशा में काम करेंगे। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और स्थायी शांति की संभावनाओं को मजबूत करना बताया गया है।

निगरानी के लिए बनेगा विशेष तंत्र


समझौते के पालन की निगरानी के लिए एक अलग व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि दोनों पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करें। साथ ही अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी दिलाने की भी योजना है, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक मान्यता मिल सके।

क्या बदल सकता है इस समझौते से?

यदि यह समझौता आधिकारिक रूप से लागू हो जाता है, तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार, पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल दुनिया की नजर आगामी 60 दिनों की वार्ताओं पर टिकी है, क्योंकि इन्हीं बैठकों में तय होगा कि यह प्रारंभिक सहमति स्थायी शांति का रास्ता बनती है या नहीं।