7 अगस्त 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पाकिस्तान-तुर्किए-सऊदी डिफेंस डील पर भारत की पैनी नजर, विदेश मंत्रालय ने दिया बड़ा बयान

Pakistan-Saudi-Turkey Defense Deal India reaction: भारत ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के नए डिफेंस समझौते पर प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि वह इस डील पर करीब से नजर रख रहा है।
2 min read
Google source verification

भारत

image

Saurabh Mall

Aug 07, 2026

Pakistan-Saudi-Turkey Defense Deal India reaction

'करीब से नज़र रख रहे हैं'... पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की के डिफेंस समझौते पर भारत का रिएक्शन (इमेज सोर्स: ANI)

India reaction Pakistan-Saudi-Turkey Defense Deal: पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी अरब के बीच हुए नए डिफेंस समझौते ने दुनिया का ध्यान खींच लिया है। इस तीन देशों की सुरक्षा डील को लेकर भारत भी सतर्क है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ कहा है कि नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए हुए है। भारत ने संकेत दिया है कि वह इस समझौते के क्षेत्रीय और सुरक्षा प्रभावों का आकलन कर रहा है।

तीन देशों के डिफेंस समझौते पर भारत की नजर

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच हुआ यह समझौता एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। भारत इसकी हर गतिविधि पर नजर रख रहा है और आगे की स्थिति का अध्ययन करेगा। सरकार देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों को ध्यान में रखते हुए सभी जरूरी कदम उठाएगी। भारत यह समझने की कोशिश कर रहा है कि इस डिफेंस डील का दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है।

बता दें यह बयान उस समय आया है जब तीनों देशों ने एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य आपसी सैन्य सहयोग को मजबूत करना बताया गया है।

क्या है पाकिस्तान-तुर्किए-सऊदी डिफेंस डील?

इस समझौते के तहत तीनों देशों ने कहा है कि किसी एक देश पर होने वाला हमला सभी के खिलाफ हमला माना जाएगा। इसके जरिए रक्षा सहयोग बढ़ाने और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने की बात कही गई है। हालांकि, इस डील में सैन्य कार्रवाई या किसी खास स्थिति में सेना भेजने जैसी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। तीनों देशों ने इसे क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सुरक्षा बढ़ाने वाला कदम बताया है।

यह समझौता सऊदी अरब में हुई एक बैठक के दौरान किया गया। इसमें सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शामिल हुए।

बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच हुआ समझौता

यह डिफेंस डील ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे विवादों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित किया है। सऊदी अरब पहले भी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर चुका है। तेल प्रतिष्ठानों और जरूरी ढांचे पर हुए हमलों के बाद उसने अपनी रक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर ध्यान दिया है। रणनीतिक विशेषज्ञ इस समझौते को क्षेत्र में एक नए सुरक्षा गठबंधन की दिशा में कदम मान रहे हैं। कुछ लोग इसे "इस्लामिक NATO" जैसी संभावनाओं से भी जोड़ रहे हैं।

भारत इस पूरे घटनाक्रम को ध्यान से देख रहा है। नई दिल्ली का मानना है कि किसी भी नए क्षेत्रीय गठबंधन का असर भारत की सुरक्षा और रणनीतिक हितों पर पड़ सकता है। इसलिए भारत स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।