
Parenting Tips: छोटे बच्चों का बात बात पर जिद करना, रोना, चिल्लाना या गुस्सा करना देखकर कई बार माता पिता परेशान हो जाते हैं। कई बार इसे बच्चे की बदमाशी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या खुद भी गुस्सा करने लगते हैं। ऐसे समय में क्या करना चाहिए, आइए जानते हैं।
यूनिसेफ इंडिया (UNICEF India) और ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) के मुताबिक सबसे पहले यह समझने की कोशिश करें कि बच्चा जिद क्यों कर रहा है। कई बार बच्चा भूखा, थका हुआ, नींद में या चिड़चिड़ा होता है। कभी वह किसी बात से परेशान, निराश या दूसरे बच्चे से जलन महसूस कर सकता है। ऐसे समय में बच्चे को समय, ध्यान और प्यार की जरूरत हो सकती है।
यूनिसेफ इंडिया (UNICEF India) के अनुसार छोटे बच्चों का ध्यान ज्यादा देर तक एक ही चीज पर नहीं रहता। इसलिए अगर बच्चा जिद करना शुरू कर रहा है तो तुरंत उसका ध्यान किसी दूसरी चीज या काम की तरफ लगाने की कोशिश करें। उसे दूसरी जगह ले जाएं, कोई दूसरी चीज दिखाएं या किसी दूसरी एक्टिविटी में लगा दें।
बच्चे की हर बात पर सीधे मना करने के बजाय उसे छोटा सा विकल्प देना मदद कर सकता है। जैसे अगर बच्चा फल खाने को लेकर जिद कर रहा है तो उससे पूछ सकते हैं कि वह सेब खाना चाहता है या केला। इससे बच्चे को अपनी पसंद बताने का मौका मिलता है और उसे लगता है कि उसकी बात भी सुनी जा रही है।
बच्चे की किसी मांग को मना करने से पहले यह भी सोच लेना चाहिए कि वह मांग सच में ऐसी है जिसे पूरा नहीं किया जा सकता। अगर बच्चे की बात आसानी से मानी जा सकती है तो हर छोटी बात पर उसे रोकने से बचें। इससे बेवजह की जिद और टैंट्रम को कम करने में मदद मिल सकती है।
ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) के अनुसार बच्चे के टैंट्रम के दौरान माता पिता का खुद गुस्सा करना या बच्चे पर चिल्लाना उसकी जिद को खत्म नहीं करता। ऐसे समय में खुद शांत रहने की कोशिश करें और बच्चे को गुस्सा शांत करने का समय दें।
अगर आपने किसी चीज के लिए बच्चे को मना किया है तो केवल उसका रोना बंद कराने के लिए अपना फैसला न बदलें। अगर हर बार टैंट्रम के बाद बच्चे की बात मान ली जाएगी तो उसे लग सकता है कि रोने या जिद करने से उसकी बात मानी जा सकती है। इसी तरह बच्चे को चुप कराने के लिए हर बार मिठाई या कोई दूसरी चीज देने का लालच भी नहीं देना चाहिए।
बच्चा जब टैंट्रम कम होने लगे और रोते हुए शांत होने की तरफ बढ़े तो उसे प्यार और सहारा दें। बच्चे को आराम दें और उसका ध्यान किसी दूसरी एक्टिविटी या चीज की तरफ लगाया जा सकता है। टैंट्रम खत्म होने के बाद बच्चे को प्यार और अपनापन देना जरूरी है।
सिर्फ बच्चे की जिद पर ध्यान देने के बजाय उसके अच्छे व्यवहार को भी नोटिस करें। जब बच्चा बिना जिद किए अपनी बात कहता है या अच्छा व्यवहार करता है तो उसकी तारीफ करें और उसे प्रोत्साहित करें। इससे बच्चे को अच्छे व्यवहार को दोहराने में मदद मिलती है।
बच्चे को पहले से साफ तरीके से बताएं कि कौन सी बात मान्य है और कौन सी नहीं। बच्चे की कुछ मांगों को लेकर पहले से नियम तय करें और जरूरत पड़ने पर उसे बार बार समझाएं। इससे बच्चे को यह समझने में मदद मिलती है कि उससे किस तरह के व्यवहार की उम्मीद की जा रही है।
छोटे बच्चे कई बार अपनी परेशानी को शब्दों में नहीं बता पाते और इसलिए गुस्से में मारना, धक्का देना या काटना शुरू कर देते हैं। ऐसे में बच्चे से उसकी परेशानी के बारे में बात करें और उसकी भावना को पहचानने में मदद करें।
घर में सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश करें ताकि बच्चा खुद को खुश और रिलैक्स महसूस करे। माता पिता को अपना भी ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि अगर माता पिता खुद तनाव में रहेंगे तो बच्चे के साथ शांत तरीके से व्यवहार करना मुश्किल हो सकता है।
अगर बच्चे के टैंट्रम बहुत ज्यादा बार होने लगें, उसकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे या बच्चा खुद को नुकसान पहुंचाने लगे तो प्रोफेशनल सलाह लेना जरूरी है।