History of Heels: फैशन की दुनिया में हाई हील्स महिलाओं के पसंदीदा फैशन कलेक्शन में से एक होती है। लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हाई हील्स की शुरुआत पुरुषों से हुई थी। लेकिन पुरुषों को ऐसा क्यों करना पड़ा था, इस लेख में इससे जुड़ी पूरी जानकारी दी गई है।
History of Heels: आज के टाइम में फैशन की दुनिया में काफी बदलाव है। चाहे वो कपड़े पहनने के तरीके में हो या बनावट में। वहीं अगर हील्स की बात करें तो समय के साथ-साथ हील्स की बनावट और डिजाइन में काफी फर्क दिख रहा है। फैशन की दुनिया में हील्स यानी ऊंची एड़ी के जूते महिलाओं की स्टाइल और आकर्षण का प्रतीक माने जाते हैं। लेकिन आपको यह बताए कि हील्स महिलाओं का नहीं, बल्कि पहले के टाइम में पुरुष पहनते थे। यह बात सुनकर थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह सच है। हील्स का इतिहास एक दिलचस्प यात्रा है, लेकिन धीरे-धीरे, फैशन के बदलाव और सामाजिक मान्यताओं के असर से, ये पुरुषों के पैरों से महिलाओं के फैशन तक पहुंच गए। तो इस लेख के जरिए जानिए हाई हील्स की अनोखी हिस्ट्री।
आज के समय में अगर आप किसी पुरुष को हील पहनने के लिए कहेंगे तो उनका जवाब होगा, "यह औरतों की पहने की चीज है।" लेकिन इसकी असलियत को जानें तो, यहां वाकई में पुरुष पहना करते थे। बात करें हील्स के इतिहास (History of Heels) की तो हील्स की शुरुआत 10वीं सदी से हुई थी। सबसे पहले, पार्शियाई घुड़सवारों ने हील्स का उपयोग किया था। घोड़े की पीठ पर बैठकर, उन्हें अपने पैरों को रकाब में स्थिर रखने के लिए ऊंची एड़ी के जूते की आवश्यकता होती थी। इसे इसलिए डिज़ाइन किया गया था क्योंकि घुड़सवारी के दौरान संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती थी। समय के साथ, यह ट्रेंड यूरोप तक पहुंचा और 16वीं सदी में पुरुषों के फैशन का अहम हिस्सा बन गया।
इसके प्रचलन से फैशन का एक बड़ा हिस्सा बन गया था, और फिर यूरोप में, हील्स को एक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाने लगा। ऊंची एड़ी के जूते पहनने वाले व्यक्ति को अमीर और प्रभावशाली समझा जाता था। हील्स को यहां तक कि फ्रांस के राजा लुई XIV ने भी अपने शाही पहनावे का हिस्सा बना लिया। उनके जूतों पर अक्सर लाल रंग की हील्स होती थीं, जो उनकी शक्ति और प्रतिष्ठा को दर्शाती थीं।
17वीं सदी के अंत तक हील्स की लोकप्रियता महिलाओं में बढ़ने लगी। इस समय के दौरान, महिलाएं पुरुषों के फैशन से प्रेरित होकर हील्स पहनने लगीं। फिर धीरे-धीरे यह खास ट्रेंड यूरोप में देखने को मिली, जहां महिलाएं अपने कपड़ों में पुरुषों के डिज़ाइन को अपनाने लगीं और फिर धीरे-धीरे 18वीं सदी में पुरुषों के बीच हील्स का प्रचलन घटने लगा, लेकिन महिलाओं के लिए यह फैशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
19वीं और 20वीं सदी में, हील्स ने महिलाओं के फैशन में अपनी एक अलग पहचान बनाई। यह न केवल स्टाइल का प्रतीक बना, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का भी प्रतीक माना जाने लगा। फैशन डिजाइनरों ने विभिन्न डिजाइन और आकर्षक रूपों में हील्स पेश किए, जिससे यह महिलाओं के लिए एक जरूरी फैशन एक्सेसरी बन गई।