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Republic Day 2026: 115 साल पुराना राष्ट्रगान, क्यों गाया जाता है 52 सेकेंड में? जानिए गाने के पीछे का राज

Republic Day 2026: भारत का राष्ट्रगान “जन गण मन” देश की आत्मा की अभिव्यक्ति है और 2026 में अपनी 115वीं वर्षगांठ मना रहा है।इसे हमेशा 52 सेकेंड में गाने के पीछे इतिहास, परंपरा और नियमों की एक खास वजह है।

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Jan 18, 2026
National anthem sung in 52 seconds|फोटो सोर्स –Freepik

Republic Day 2026: किसी भी देश का राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान न सिर्फ उसकी पहचान होते हैं, बल्कि देशवासियों के लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक भी होते हैं। भारत का राष्ट्रगान, ‘जन गण मन’, पहली बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गाया गया था। उस समय इसे बंगाली और हिंदी के मिश्रण में प्रस्तुत किया गया था। इस गाने को 115 वर्ष पूरे कर चुका है लेकिन यह गीत हर भारतीय के दिल में एक खास जगह रखता है। इसे सटीक 52 सेकेंड में गाया जाता है, और इसके पीछे एक दिलचस्प कारण है।

राष्ट्रगान के रचयिता नोबेल पुरस्कार विजेता राष्ट्रकवि

भारत के राष्ट्रगान की रचना महान कवि, दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर ने वर्ष 1911 में की थी। उन्होंने इसे मूल रूप से बंगाली भाषा में लिखा था। बाद में आबिद अली ने इसका हिंदी और उर्दू में रूपांतरण किया।आजादी के बाद 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने जन गण मन को आधिकारिक रूप से भारत का राष्ट्रगान घोषित किया।

राष्ट्रगान 52 सेकेंड में ही क्यों?

भारतीय सरकार द्वारा तय नियमों के अनुसार राष्ट्रगान की पूर्ण अवधि 52 सेकेंड होती है। इसे 49 से 52 सेकेंड के बीच ही गाया जाना चाहिए, ताकि इसकी लय, गरिमा और भाव एक समान बने रहें।कुछ विशेष अवसरों पर इसका संक्षिप्त रूप भी गाया जाता है, जिसमें केवल पहली और अंतिम पंक्तियां होती हैं। इसमें लगभग 20 सेकेंड का समय लगता है।

नेताजी सुभाषचंद्र बोस और ‘जय हे’

जन गण मन के कुल पांच पद हैं, लेकिन राष्ट्रगान के रूप में केवल पहले पद को ही अपनाया गया।नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज में इसी गीत को ‘जय हे’ नाम से अपनाया था।इसका पहला प्रकाशन 1912 में ‘तत्वबोधिनी पत्रिका’ में हुआ था, तब इसका शीर्षक था “भारत विधाता”।आज भी तेलंगाना के जम्मीकुंटा गांव और हरियाणा के भनकपुर गांव में हर सुबह सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाया जाता है।

खुद टैगोर ने किया था अंग्रेजी अनुवाद

यह जानकर बहुत कम लोग हैरान होते हैं कि 1919 में गुरुदेव टैगोर ने स्वयं इस गीत का अंग्रेजी अनुवाद किया था, जिसका नाम रखा गया था “The Morning Song of India”।पंडित जवाहरलाल नेहरू के विशेष अनुरोध पर ब्रिटिश संगीतकार हर्बर्ट मुरिल्ल ने इसे ऑर्केस्ट्रा धुनों में भी ढाला।एक और गौरवपूर्ण तथ्य यह है कि टैगोर ही बांग्लादेश के राष्ट्रगान “अमार सोनार बांग्ला” के भी रचयिता थे।

राष्ट्रगान के सम्मान से जुड़ा कानून

राष्ट्रगान का सम्मान बनाए रखने के लिए Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 लागू है।इसके तहत राष्ट्रगान का अपमान करने, बाधा डालने या जानबूझकर अनादर दिखाने पर तीन साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।जब भी राष्ट्रगान बजाया जाए, नागरिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सावधान की मुद्रा में खड़े हों।राष्ट्रध्वज फहराने, परेड, सरकारी कार्यक्रमों और राष्ट्रपति के राष्ट्रीय संबोधन से पहले और बाद में राष्ट्रगान बजाने की परंपरा है।

Updated on:
18 Jan 2026 12:44 pm
Published on:
18 Jan 2026 12:18 pm
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