Aadhaar Format Glitch Leaves Thousands of Driving Licence : लखनऊ में आधार कार्ड के नए स्वरूप और परिवहन विभाग के सॉफ्टवेयर के बीच तकनीकी तालमेल की कमी से ड्राइविंग लाइसेंस आवेदक परेशान हैं। पिता या पति का नाम स्पष्ट न होने पर आवेदन खारिज हो रहे हैं। सात महीनों से जारी समस्या के कारण 8,200 से अधिक DL आवेदन लंबित पड़े हैं।
Driving Licence Aadhar Issue: लखनऊ में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनवाने की प्रक्रिया इन दिनों हजारों लोगों के लिए सिरदर्द बन गई है। वजह है आधार कार्ड के नए स्वरूप और परिवहन विभाग के NIC पोर्टल के बीच तालमेल की कमी। आधार में पिता या पति के नाम की जगह “Care Of” या खाली कॉलम होने से सिस्टम आवेदन स्वीकार नहीं कर रहा, जिसके चलते पिछले सात महीनों से समस्या जस की तस बनी हुई है। परिणामस्वरूप 8,200 से अधिक DL आवेदन लंबित हो चुके हैं और आवेदक RTO दफ्तर से लेकर परिवहन आयुक्त कार्यालय तक चक्कर काटने को मजबूर हैं।
हाल के वर्षों में आधार कार्ड के फॉर्मेट में बदलाव किया गया है। कई आधार कार्ड में पारिवारिक पहचान के कॉलम में “S/O, D/O, W/O” की जगह केवल “Care Of” (C/O) लिखा होता है या कॉलम खाली होता है। दूसरी ओर, परिवहन विभाग का NIC आधारित सॉफ्टवेयर अब भी पारंपरिक डेटा फॉर्मेट पर काम कर रहा है, जिसमें पिता या पति का नाम अनिवार्य फील्ड है। जैसे ही आवेदक आधार नंबर से विवरण फेच करता है, सिस्टम ऑटोमैटिक वेरिफिकेशन में पिता/पति का नाम न मिलने पर आवेदन खारिज कर देता है। इस तकनीकी असंगति ने हजारों लोगों की फाइलें रोक दी हैं।
RTO सूत्रों के मुताबिक, यह समस्या लगभग सात महीने पहले सामने आई थी। शुरुआत में इसे कुछ मामलों तक सीमित माना गया, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यापक बन गई। लखनऊ RTO में प्रतिदिन सैकड़ों DL आवेदन आते हैं, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे आवेदकों की है जिनके आधार में पारिवारिक विवरण का कॉलम पारंपरिक तरीके से दर्ज नहीं है। अधिकारियों ने NIC और उच्चाधिकारियों को समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अब तक सॉफ्टवेयर अपडेट या वैकल्पिक प्रक्रिया लागू नहीं हो सकी है।
इस गड़बड़ी का सबसे ज्यादा असर छात्रों, नौकरीपेशा युवाओं और महिलाओं पर पड़ रहा है। कई छात्र लर्नर लाइसेंस के बाद स्थायी लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे। नौकरी के लिए DL जरूरी होने पर भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही।
महिलाएं, जिनके आधार में पिता या पति के नाम की जगह “Care Of” है, विशेष रूप से प्रभावित हैं। आवेदकों का कहना है कि वे आधार अपडेट कराने UIDAI केंद्र जाते हैं, जहां उन्हें बताया जाता है कि मौजूदा स्वरूप वैध है और परिवर्तन जरूरी नहीं। वहीं RTO कार्यालय में बिना संशोधन आवेदन स्वीकार नहीं हो रहा।
कई आवेदकों ने बताया कि वे पहले RTO पहुंचे, जहां उन्हें तकनीकी दिक्कत बताकर वापस कर दिया गया। इसके बाद वे परिवहन आयुक्त कार्यालय तक पहुंचे, लेकिन वहां भी समाधान नहीं मिला। कागजी दस्तावेज जैसे राशन कार्ड, पैन कार्ड या शपथ पत्र देने का विकल्प भी फिलहाल सॉफ्टवेयर स्वीकार नहीं कर रहा, क्योंकि पूरा सिस्टम आधार आधारित ऑटो-वेरिफिकेशन पर निर्भर है।
स्थानीय RTO कर्मियों का कहना है कि वे खुद असमंजस में हैं। आवेदन खारिज होने के बाद मैनुअल हस्तक्षेप की सीमित गुंजाइश है। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह पूरी तरह सॉफ्टवेयर स्तर की समस्या है। जब तक NIC पोर्टल अपडेट नहीं होगा या वैकल्पिक दस्तावेज स्वीकार करने की अनुमति नहीं मिलेगी, तब तक समाधान संभव नहीं।
सरकार डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा दे रही है, लेकिन यह मामला दिखाता है कि विभिन्न सरकारी डेटाबेस के बीच समन्वय की कमी आम लोगों पर भारी पड़ रही है। आधार का नया स्वरूप कानूनी रूप से मान्य है, जबकि परिवहन विभाग का सॉफ्टवेयर पुराने पैटर्न पर अटका है। इस असंगति ने सेवा वितरण की गति धीमी कर दी है।
आवेदकों की मांग है कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर इस समस्या का समाधान निकाले। उनका कहना है कि डिजिटल इंडिया की पहल तभी सफल होगी, जब तकनीकी व्यवस्था आम नागरिक के लिए सरल और समन्वित हो।