
Akhilesh Yadav Statement: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम को लेकर दिए गए बयानों पर नाराजगी जताई है। अखिलेश ने बुधवार को सोशल मीडिया पर बिना नाम लिए कहा कि उनकी टिप्पणी से यदुवंशियों और रघुवंशियों, दोनों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने यहां तक लिखा कि अब उन्हें न ब्रज में प्रवेश मिलेगा और न अवध में। धीरेंद्र शास्त्री की अगली कथा प्रतापगढ़ के कुंडा में 17 से 20 नवंबर तक होनी है, जिसका आयोजन राजा भैया करा रहे हैं।
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा कि अब न तो कोई सच्चा रघुवंशी इनका स्वागत करेगा, न सच्चा यदुवंशी। यूपी-एमपी के बॉर्डर पर इनकी नाकेबंदी का बोर्ड लग जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईशनिंदा करने वालों का यूपी की धर्म-भूमि पर प्रवेश वर्जित है। उन्होंने आगे लिखा कि जिसने धर्म-मजहब नहीं छोड़ा वो अगली बार सम्प्रदायों पर छींटाकशी करने से बाज नहीं आएगा। समझाने की जरूरत नहीं अगला नंबर किस का है। नेपाल बॉर्डर भी बंद करना पड़ेगा, नहीं तो उधर से इधर आना ज्यादा पास पड़ेगा।
अखिलेश ने यह भी कहा कि लगता है यूपी में किसी बाहरी के इशारे पर किसी की राजनीतिक-धार्मिक सत्ता को चुनौती देने का काम हो रहा है। आपस की टकराहट में सियासी लोग भगवान को क्यों ला रहे हैं।
यह विवाद मध्यप्रदेश के शिवपुरी में धीरेंद्र शास्त्री की श्रीराम कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण पर की गई टिप्पणी के बाद शुरू हुआ। 10 अक्टूबर को इसका वीडियो सामने आने के बाद मथुरा के साधु-संतों ने नाराजगी जताई थी और उनसे माफी मांगने की मांग की थी।
वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री कहते दिख रहे हैं, 'तुम अपने वाले ठाकुरजी की एक भी फोटो देख लो। खड़े भी होते हैं, तो तीन जगह से टेढ़े। पांव के ऊपर पांव, कहीं कमर लचकाएं और टेढ़ी गर्दन करके बंसी बजाते हैं। हमारे वाले तो खड़े भी होते हैं, एकदम सीधे। हमारे वाले का नाम भी सीधा। हमारे वाले का चलना भी सीधा, हमारे वाले दिखते भी सीधे हैं। तुम्हारे वालों का नाम भी टेढ़ा, चलते भी टेढ़े, खड़े भी टेढ़े होते हैं। पर्वत उठाना बड़ी बात नहीं। हमारे भगवान के चेले ने पूरा पर्वत उड़ा दिया था। हमारे वालों का धाम भी सीधा- अयोध्या, तुम्हारे वाले का- वृंदावन!'
विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि उनकी बात का गलत मतलब निकाला गया। उन्होंने कहा, हम खुद ठाकुरजी और ब्रज के भक्त हैं। जब भी ठाकुरजी से प्रार्थना करते हैं, तो कहते हैं कि हमें ब्रज में वास मिले। हम श्रीमद्भागवत कथा भी कहते हैं और ठाकुरजी का गुणगान करते हैं। हमारा भगवान राम और कृष्ण में भेद करने का कोई इरादा नहीं था।