
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (ANI Photo)
Uttar Pradesh Politics News: गृह मंत्री अमित शाह के उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार की स्थिति की तुलना अंगद के पैर से करने वाले बयान पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि अंगद का पैर सत्ता या अहंकार के बल पर नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के सत्य, धर्म और न्याय के आधार पर टिका था। शंकराचार्य ने धर्मग्रंथों के प्रसंगों का राजनीतिक इस्तेमाल करने पर भी सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर निशाना साधते हुए बटुकों और संतों पर अत्याचार के आरोप लगाए।
शंकराचार्य ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह तीन दिन पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ आए थे। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संदर्भ में कहा था कि वे अंगद के पैर की तरह जमे हुए हैं। शंकराचार्य ने कहा कि अंगद ने रावण की सभा में अपना पैर जमाया था, लेकिन इस उदाहरण को योगी सरकार पर लागू नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि अंगद का पैर रावण के अहंकार के सामने भगवान श्रीराम के धर्म, सत्य और न्याय के कारण अडिग था। उसके पीछे किसी राजनीतिक सत्ता का घमंड नहीं था। शंकराचार्य ने कहा कि नेताओं को धार्मिक उदाहरणों का इस्तेमाल करने से पहले यह समझना चाहिए कि वे प्रसंग के हिसाब से सही भी हैं या नहीं। अपनी सुविधा के अनुसार धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करना धर्म का अनादर है। उन्होंने कहा कि धर्म है अटल सत्य, अधर्म अटल सत्य नहीं है, अधर्म का तो खंबा गिर ही जाता है किसी न किसी दिन।
शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बटुकों की चोटी खींचने और संतों पर निर्ममता से प्रहार करने वाले शासन की तुलना रामराज्य से नहीं की जा सकती। उन्होंने गोवंश को लेकर दावा किया कि साल 2019 से 2024 के पांच साल के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश से 71 लाख गायें गायब हो गईं।
उन्होंने सरकार की ओर से दीपावली पर 7 हजार गोशालाओं में दीप जलाने की घोषणा पर भी सवाल उठाए। शंकराचार्य का कहना था कि केवल दीप जलाने और कार्यक्रम करने से गोशालाओं की स्थिति अच्छी नहीं हो जाती। पहले वहां गायों के लिए बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गोशालाओं की असल स्थिति देखी जानी चाहिए, न कि केवल वीडियो के जरिए अच्छी तस्वीर दिखाई जाए।
शंकराचार्य ने 22 तारीख को गायों के साथ लखनऊ जाने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी उनके कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकलने वाले लोगों को पुलिस ने उनके घरों में रोक दिया था। उनके मुताबिक, कई लोगों ने पुलिस की तैनाती के वीडियो और फोटो भेजे थे। इस वजह से लोगों को आशंका है कि गायों के साथ निकलने पर उन्हें रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर गांवों से सभी गायों को आने की अनुमति नहीं मिली तो हर गांव से एक गाय लाई जाएगी। अगर वहां से भी अनुमति नहीं मिली तो विधानसभा क्षेत्र से एक गाय और जरूरत पड़ने पर प्रतीक के तौर पर गाय लेकर लोग लखनऊ पहुंचेंगे।
Updated on:
4 Nov 2026, 10:29 AM IST
Published on:
4 Nov 2026, 9:55 AM IST
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