
Akhilesh Yadav on Divya Mittal Resignation: IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव नेउत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि मौजूदा माहौल में ईमानदार अधिकारियों के लिए काम करना मुश्किल हो गया है। उनके मुताबिक, अधिकारियों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जिसके चलते कई लोग निर्धारित समय से पहले ही नौकरी छोड़ने का फैसला कर रहे हैं।
दिव्या मित्तल ने 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद IAS से इस्तीफा देने की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए साझा की थी। इसी का हवाला देते हुए अखिलेश यादव ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए और प्रशासनिक व्यवस्था में अधिकारियों को स्वतंत्र होकर काम करने का माहौल देने की मांग की।
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार के मौजूदा कार्यकाल में ईमानदार अधिकारियों के लिए काम करना आसान नहीं रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और दबाव के कारण अधिकारी परेशान हैं और कुछ लोग समय से पहले ही सेवा से बाहर होने का फैसला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को बिना किसी भय और दबाव के अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। दिव्या मित्तल के इस्तीफे को उन्होंने इसी व्यापक स्थिति से जोड़कर सरकार पर हमला बोला।
सपा प्रमुख ने कहा कि दिव्या मित्तल ने 13 साल तक प्रशासनिक सेवा में काम करने के बाद इस्तीफा दिया है और इसकी जानकारी उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर दी है। दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में अपने प्रशासनिक सफर और देश सेवा के अनुभवों को साझा किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि पद से अलग होने के बावजूद लोगों का विश्वास और देश के लिए काम करने का सपना उनके लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि आम जनता की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार के पास इन समस्याओं का प्रभावी समाधान नहीं है। उन्होंने रोजगार, शिक्षा, कानून-व्यवस्था और महंगाई से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
अखिलेश यादव ने प्रदेश में बंद पड़े करीब 26 हजार स्कूलों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर इन स्कूलों को दोबारा शुरू कराया जाएगा। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूलों का बंद होना बच्चों और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
सपा अध्यक्ष ने सरकारी नौकरियों और भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जनवरी के बाद आचार संहिता लागू होने की स्थिति में एक लाख नौकरियां देने का दावा कितना प्रभावी होगा, इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने सरकार के रोजगार संबंधी दावों को लेकर भी सवाल खड़े किए और युवाओं के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की बात कही।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने मेरठ की एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव की ओर से पुलिस हिरासत में थर्ड डिग्री टॉर्चर के लगाए गए आरोपों का उल्लेख किया। इस मामले में एक इंस्पेक्टर को निलंबित किए जाने की बात सामने आई है। अखिलेश यादव ने कथित पीड़ितों को अदालत का रुख करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो दोनों को न्याय और सम्मान दिलाया जाएगा।
अखिलेश यादव ने कथित तौर पर गंभीर चोटों के बावजूद मेडिकल जांच में देरी किए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने इसे गंभीर और आपत्तिजनक बताते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पीड़ितों को समय पर चिकित्सा जांच और कानूनी प्रक्रिया का लाभ मिलना चाहिए।
सरकारी संपत्तियों को लेकर भी अखिलेश यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने लखनऊ स्थित JPNIC और ऐतिहासिक छतर मंजिल का उदाहरण देते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल और उन्हें निजी हितों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि JPNIC की पार्किंग और कैफे जैसी सुविधाओं से भी कमाई के रास्ते तलाशे जा रहे हैं। अखिलेश ने दावा किया कि सरकार का यह मॉडल आम लोगों के बजाय चुनिंदा बड़े कारोबारियों को फायदा पहुंचाने वाला है।
अखिलेश यादव ने खंगार समाज के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने जातीय जनगणना की मांग दोहराते हुए कहा कि आबादी के अनुपात में समाज को रोजगार और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समाज के लोग चुनावी राजनीति में आगे आते हैं तो समाजवादी पार्टी की ओर से उन्हें समर्थन दिया जाएगा।
महिलाओं के सम्मान और आर्थिक सहायता का मुद्दा उठाते हुए अखिलेश यादव ने बड़ा चुनावी वादा किया। उन्होंने कहा कि उनकी पिछली सरकार के दौरान महिलाओं को 500 रुपये दिए जाते थे और सत्ता में वापसी होने पर इस राशि को बढ़ाकर 40 हजार रुपये किया जाएगा। उन्होंने बढ़ती महंगाई का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं और परिवारों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
अखिलेश यादव ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहरी माफिया प्रदेश में आकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और सरकार उन्हें रोकने में नाकाम है। उन्होंने अपराध नियंत्रण को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यशैली में सुधार की जरूरत बताई।
सपा प्रमुख ने प्रदेश में खराब सड़कों और जलभराव की समस्या का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान कई शहरों और इलाकों में जलभराव लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है। इसके अलावा उन्होंने महंगी चीनी और कथित मिलावटी पेट्रोल का मुद्दा उठाते हुए प्रशासन पर सवाल खड़े किए। अखिलेश यादव ने दावा किया कि सरकार को आम जनता से जुड़े इन मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिव्या मित्तल के इस्तीफे से लेकर बेरोजगारी, शिक्षा, महंगाई, कानून-व्यवस्था और सरकारी संपत्तियों तक कई मुद्दे शामिल रहे। उन्होंने इन सभी मामलों के जरिए प्रदेश सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठाए। दिव्या मित्तल के इस्तीफे को लेकर उनका बयान ऐसे समय आया है जब IAS अधिकारी के 13 साल की सेवा के बाद इस्तीफा देने की खबर चर्चा में है। वहीं, अखिलेश यादव ने इसे अधिकारियों के कामकाज के माहौल से जोड़ते हुए सरकार पर राजनीतिक हमला किया है।