
Akhilesh Yadav Jayant Chaudhary Controversy: उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की राजनीति ने जोर पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के चवन्नी को रुपया बना दिया वाले बयान पर शुरू हुआ विवाद अब सीटों के बंटवारे तक पहुंच गया है। राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के अध्यक्ष जयंत चौधरी और बसपा सुप्रीमो मायावती की आपत्ति के बाद अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए बीजेपी और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधा।
अखिलेश यादव ने लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि बीजेपी को अपने सहयोगी दलों को आगामी विधानसभा चुनाव में अधिक सीटें देनी चाहिए। उन्होंने इसी बहाने RLD को लेकर तंज भी कसा। अखिलेश ने कहा कि अगर किसी सहयोगी को 30 सीटें दी जा रही हैं तो उसे चार गुना यानी 120 सीटें दी जानी चाहिए। उनके मुताबिक, इससे सहयोगी दलों को सम्मान भी मिलेगा और गठबंधन की वास्तविक तस्वीर भी सामने आएगी।
अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी के सहयोगी दलों को विधानसभा चुनाव में पर्याप्त हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने सीटों के बंटवारे को लेकर कहा कि अगर 30 सीटों का हिसाब लगाया जा रहा है तो चार गुना करने पर आंकड़ा 120 तक पहुंचता है। सपा प्रमुख ने इसे केवल सीटों का सवाल नहीं बताया, बल्कि सहयोगी दलों के सम्मान से जोड़ दिया। उन्होंने चौधरी चरण सिंह और चौधरी अजित सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि अगर सहयोगियों को उचित हिस्सेदारी नहीं मिलती है तो यह उनके राजनीतिक विरासत और समाज के सम्मान का भी सवाल बनेगा।
जयंत चौधरी और मायावती की प्रतिक्रिया पर अखिलेश यादव ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी गठबंधन तोड़ने वाली पार्टी नहीं है। उनका कहना था कि सपा जब किसी दल के साथ गठबंधन करती है तो उसे साथ लेकर चलने की कोशिश करती है। अखिलेश ने कहा कि कई बार सच बोलने पर लोग नाराज हो जाते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन को लेकर समाजवादी पार्टी की नीति सहयोगियों को जोड़कर चलने की रही है। उनके मुताबिक, सपा किसी को छोड़कर नहीं जाती, बल्कि कई बार सहयोगी खुद अलग हो जाते हैं।
दरअसल, विवाद की शुरुआत अखिलेश यादव के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने अपने पुराने गठबंधन सहयोगियों को लेकर तंज कसते हुए कहा था कि ‘हमने चवन्नी को रुपया बना दिया, फिर भी लोग छोड़कर चले गए।’ अखिलेश के इस बयान को जयंत चौधरी ने गंभीरता से लिया और इसे जाट समाज के सम्मान से जोड़ते हुए आपत्ति जताई। इसके बाद मायावती ने भी जयंत चौधरी का समर्थन किया और अखिलेश यादव से बयान पर माफी मांगने की मांग की। अब अखिलेश के ताजा बयान ने इस विवाद को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। उन्होंने सीधे जयंत का नाम लिए बिना बीजेपी के सहयोगी दलों के लिए अधिक सीटों की बात उठाई है। ऐसे में ‘चवन्नी’ विवाद अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि 2027 के चुनाव में गठबंधन और सीट बंटवारे की संभावित रणनीति से भी जुड़ता नजर आ रहा है।
इस पूरे विवाद की एक अहम कड़ी अखिलेश यादव का वह दावा भी है, जिसमें उन्होंने NDA के संभावित सीट बंटवारे का जिक्र किया था। अखिलेश ने सूत्रों के हवाले से कहा था कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी अपने सहयोगी दलों के बीच कुल 162 सीटें बांट सकती है। उनके दावे के मुताबिक RLD को 73, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को 39, निषाद पार्टी को 31 और अपना दल (एस) को 19 सीटें मिल सकती हैं। हालांकि, इन आंकड़ों को लेकर बीजेपी या उसके सहयोगी दलों की ओर से आधिकारिक सीट बंटवारा घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में अखिलेश का यह दावा फिलहाल राजनीतिक बयान के तौर पर ही देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बीजेपी के साथ RLD, निषाद पार्टी, अपना दल (एस) और SBSP जैसे सहयोगी दलों की भूमिका को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। वहीं, सपा भी अपने संभावित गठबंधन और सीटों के समीकरण को लेकर सक्रिय है। ‘चवन्नी’ विवाद के बाद अखिलेश का 120 सीटों वाला बयान इसी बड़े राजनीतिक समीकरण का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में सीट बंटवारे, सहयोगियों के सम्मान और गठबंधन की मजबूती को लेकर यूपी की राजनीति में बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।