
अखिलेश ने बताया परिवार के 5 सांसदों का फायदा
Akhilesh Yadav SP Split Statement: समाजवादी पार्टी में टूट और गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने शनिवार को कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सपा के भीतर किसी संभावित विभाजन की स्थिति में भी पार्टी के पास पर्याप्त संख्या और मजबूत सामाजिक आधार मौजूद है। इसी दौरान उन्होंने परिवारवाद को लेकर भी एक दिलचस्प टिप्पणी की और कहा कि कभी-कभी वंशवादी राजनीति के फायदे भी होते हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी के पांच सांसद एक ही परिवार से हैं। उनके मुताबिक, पार्टी के पास कई मुस्लिम सांसद और मजबूत समाजवादी विचारधारा वाले नेता भी हैं। यही वजह है कि अगर कुछ सांसद अलग भी होते हैं तो पार्टी की स्थिति कमजोर होकर खत्म नहीं होगी।
अखिलेश ने कहा कि यह सवाल भी पूछा जाना चाहिए कि आखिर पूरी पार्टी अब तक क्यों नहीं टूटी। उन्होंने इसकी एक वजह परिवार के पांच सांसदों को बताया। उनका कहना था कि पार्टी में अलग-अलग सामाजिक वर्गों और विचारधारा से जुड़े सांसद भी हैं, इसलिए किसी छोटे बदलाव से सपा का राजनीतिक आधार खत्म नहीं होगा। परिवारवाद पर टिप्पणी करते हुए सपा प्रमुख ने संकेत दिया कि जिस राजनीति को अक्सर विपक्षी दल उनके खिलाफ मुद्दा बनाते हैं, वही कुछ परिस्थितियों में संगठनात्मक मजबूती का कारण भी बन सकती है।
सपा के सहयोगी दलों को लेकर चल रही अटकलों पर भी अखिलेश यादव ने अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी गठबंधन तोड़ने वाली पार्टी नहीं है। अखिलेश के मुताबिक, जब सपा किसी राजनीतिक दल के साथ आगे बढ़ने का फैसला करती है तो वह अपनी प्रतिबद्धता निभाती है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने हमेशा गठबंधन के वादों और सहयोगियों के साथ किए गए समझौतों का सम्मान किया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब यूपी की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन और सीट बंटवारे की चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं।
अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी की राजनीति के केंद्र में PDA को बताते हुए कहा कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज को जोड़ना सपा की बड़ी रणनीति है। उन्होंने दावा किया कि विरोधी दल PDA से घबराए हुए हैं और इसलिए इसकी अलग-अलग व्याख्या करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज में इन वर्गों को जितनी ज्यादा परेशानी होगी, PDA उतना ही मजबूत होता जाएगा। अखिलेश के इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा की सामाजिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव ने बढ़ती महंगाई को लेकर भी बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल से लेकर रोजमर्रा की जरूरी चीजों तक की कीमतें आम लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। त्योहारों के मौसम में महंगाई का असर लोगों के घरेलू बजट पर और ज्यादा पड़ने की बात उन्होंने कही। चीनी की बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाते हुए अखिलेश ने गन्ने से एथेनॉल उत्पादन की नीति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से कारोबारियों को फायदा हो रहा है, जबकि दूसरी ओर चीनी महंगी हो रही है। सपा प्रमुख ने सवाल उठाया कि इन नीतियों से होने वाला आर्थिक फायदा आखिर किसकी जेब में जा रहा है और इसका बोझ आम उपभोक्ता क्यों उठाए?
अखिलेश यादव ने सरकार की प्रति व्यक्ति आय से जुड़ी उपलब्धियों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने प्रदेश में सरकारी राशन पर निर्भर बड़ी आबादी का जिक्र करते हुए पूछा कि अगर आर्थिक स्थिति बेहतर हो रही है तो उन करीब 15 करोड़ लोगों की वास्तविक प्रति व्यक्ति आय कितनी है, जिन्हें अभी भी सरकारी खाद्यान्न की जरूरत पड़ रही है। उनका सवाल आर्थिक आंकड़ों और आम आदमी की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को लेकर था। अखिलेश ने कहा कि विकास का आकलन सिर्फ आंकड़ों से नहीं, बल्कि लोगों की आर्थिक स्थिति और जीवन स्तर से होना चाहिए।
सपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी बीजेपी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी प्राइमरी स्कूलों की व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। अखिलेश ने अपनी पिछली सरकार के दौरान सरकारी स्कूलों में किए गए कामों का जिक्र करते हुए कहा कि इन स्कूलों में बड़ी संख्या में आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करना सीधे तौर पर गरीब और वंचित परिवारों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी दोबारा सत्ता में आती है तो सरकारी प्राथमिक स्कूलों के बुनियादी ढांचे और शिक्षा की गुणवत्ता पर फोकस किया जाएगा। बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम करने की बात उन्होंने कही।
अखिलेश यादव के ताजा बयानों से साफ है कि समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव से पहले तीन बड़े मुद्दों को लगातार आगे बढ़ा रही है, PDA के जरिए सामाजिक समीकरण, महंगाई के जरिए सरकार पर हमला और सरकारी स्कूलों के जरिए शिक्षा का मुद्दा। इसके साथ ही गठबंधन को लेकर पार्टी के रुख को स्पष्ट करके अखिलेश ने उन अटकलों को भी शांत करने की कोशिश की है, जिनमें सपा के सहयोगियों के साथ रिश्तों को लेकर सवाल उठ रहे थे।
Updated on:
22 Aug 2026 08:02 pm
Published on:
22 Aug 2026 08:02 pm
