Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोने पर बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी और ‘सोनाबंदी’ को लेकर BJP सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नई नीतियों से छोटे सुनार और स्वर्णकार कारोबारियों पर आर्थिक संकट गहरा सकता है। बड़ी कंपनियों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बढ़ती लागत से लाखों कारीगरों के रोजगार पर असर पड़ने की आशंका जताई।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सुनार और स्वर्णकार समाज की समस्याओं को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सोने पर बढ़ाई गई इंपोर्ट ड्यूटी और ‘सोनाबंदी’ जैसे फैसलों से छोटे कारोबारियों पर संकट गहरा गया है। पहले से लूट और बाजार में बड़ी कंपनियों की प्रतिस्पर्धा झेल रहे सुनारों के सामने अब कारोबार बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश के सुनार और स्वर्णकार समाज की परेशानियों को लेकर भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारियों के सामने हालात लगातार कठिन होते जा रहे हैं। सरकारी नीतियां उनकी मुश्किलें बढ़ा रही हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में सुनार व्यापारियों के साथ हो रही लूट और अपराध की घटनाएं पहले से चिंता का विषय बनी हुई थीं। ऐसे माहौल में अब सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने और ‘सोनाबंदी’ जैसे फैसलों ने व्यापारियों की चिंता और बढ़ा दी है। उनका कहना है कि इन फैसलों का सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों पर पड़ेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी ज्वेलरी कंपनियां पहले ही बाजार में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। छोटे शहरों और कस्बों के पारंपरिक सुनार उनसे मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। अब नई नीतियों के कारण उनकी लागत बढ़ेगी। जिससे कारोबार चलाना और मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यही स्थिति बनी रही तो लाखों छोटे सुनारों और कारीगरों का रोजगार प्रभावित हो सकता है।
सपा प्रमुख ने कहा कि सुनार और स्वर्णकार समाज के लोग भारी निवेश के साथ अपना कारोबार खड़ा करते हैं। वर्षों की मेहनत और भरोसे के दम पर चलने वाली उनकी दुकानें आज आर्थिक दबाव में कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं। उन्होंने कहा कि जब सुनार जैसे स्थापित कारोबारी वर्ग की यह स्थिति है तो छोटे व्यापारियों और आम दुकानदारों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
अखिलेश यादव ने सरकार से मांग की कि छोटे कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीतियां बनाई जाएं। जिससे पारंपरिक व्यापार सुरक्षित रह सके। और स्थानीय कारोबारियों को राहत मिल सके।