
Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के ‘रणछोड़’ वाले बयान पर पलटवार किया है। अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने जो टीका-टिप्पणी की है वो भी किसी ‘दुष्मुखी’ के वचनों से प्रेरित लगती है। भगवान कृष्ण के एक अन्य नाम ‘रणछोड़’ को नकारात्मक भाव में प्रयुक्त करके उन्होंने साबित कर दिया है कि उनका ज्ञान कितना सीमित।
अखिलेश ने भाजपा की अंदरूनी खींचतान और नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई का जिक्र करते हुए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को अपना टिकट घोषित करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि जिनकी खुद की टिकट उनके पड़ोसी पक्की नहीं होने दे रहे, उन्हें चुप रहना चाहिए।
अखिलेश ने लोकसभा से सीधे मुख्यमंत्री बनने की बात पर भी जवाब दिया। उन्होंने लिखा, रही बात लोकसभा से सीधे मुख्यमंत्री बनने की तो वो यह कहकर किसकी ओर इशारा कर रहे हैं, गोरखपुरवाले इस पुरानी रार-तकरार को समझते हैं। गोरखपुर की जनता को सब दिख रहा है, वो काला चश्मा लगाए नहीं बैठी है।
उन्होंने भाजपा के भीतर चल रही खींचतान पर भी निशाना साधा। अखिलेश ने कहा, अब दिल्ली-लखनऊ की ही आपसी लड़ाई नहीं, गोरखपुर के अंदर भी भाजपा में वर्चस्व की अंदरूनी लड़ाई ‘लिखा-पढ़ी’ में बाहर आ गई है। उन्होंने नोटिस देने वालों का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश का प्रबुद्ध समाज उन्हें भूला नहीं है।
सपा प्रमुख ने अपने पुराने सवालों को दोहराते हुए लिखा कि हमने कभी जो प्रश्न पूछे थे आज फिर पूछ रहे हैं क्योंकि तबसे लेकर आज तक ये प्रश्न अनुत्तरित ही रहे हैं :
अखिलेश ने आगे लिखा कि जिनके नाम का पर्यायवाची ही ‘कमल’ हो, वो ही आपसी लड़ाई में कमल का निशान पाने के लिए तरस जाएंगे, अगर ऐसा नहीं है तो प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते भाजपा का सबसे पहला टिकट वो अपना ही घोषित करें।
दरअसल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर अखिलेश यादव को लेकर पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा था, 'रणछोड़ अखिलेश, पहले चुनौती दी, अब भाग खड़े हुए। अब क्या सीधे लोकसभा से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे? यह बिल्कुल वैसी ही बात है, जैसे बिना चुनाव के रिजीम चेंज। यही सपाइयों की सच्चाई है। जब सत्ता में थे, तब नोएडा जाने से डरते थे। अब चुनाव लड़ने से डर रहे हैं।'
मंगलवार को वाराणसी पहुंचे अखिलेश यादव से पत्रकारों ने पूछा था कि क्या वह 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। इस पर उन्होंने कहा था कि हम मुख्यमंत्री तब बनते हैं, जब इलेक्शन नहीं लड़ते हैं। इसलिए वही करेंगे जो हमारे लिए शुभ है। अखिलेश ने कहा था कि 2012 में भी वह लोकसभा सदस्य रहते हुए मुख्यमंत्री बने थे। इस बार भी लोकसभा सदस्य रहते हुए ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। जब उनसे पूछा गया कि वाराणसी में सपा किस सीट से चुनाव लड़ेगी तो उन्होंने पत्रकार से कहा कि तुम सीट बताओ।