
लखनऊ. असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन(एनआरसी) को लेकर छिड़ी जंग राजनीतिक रंग ले चुकी है। यह मामला अौर भी ज्यादा गंभीर होता नजर आ रहा है। एक तरफ जहां सरकार की ओर से इसका बचाव किया जा रहा है तो वहीं विपक्ष पूरी तरह आक्रामक रवैया अपनाए हुए है। बयानों के सिलसिले जारी है। इस क्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी ट्वीट के जरिए इस मामले में अपना पक्ष रखा है।
अखिलेश यादव ने किया ये ट्वीट
अखिलेश यादव नें ट्वीट करते हुए कहा कि 'सबको स्वीकार करने की भावना, सहिष्णुता व वसुधैव कुटुम्बकम हमारी संस्कृति के मूल मूल्य हैं। इसीलिए हमें नागरिकता के विषय पर मानवीय पहलू को समझकर ही कोई निर्णय करना चाहिए, लेकिन इसमें न तो राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता होना चाहिए और न ही कोई संकीर्ण राजनीतिक सोच या तुच्छ लक्ष्य'।
दलित अौर पिछड़ों को परेशान कर रही भाजपा
वहीं इस मामले में बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी भाजपा पर धार्मिक आधार पर भेदभाव करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा दलित अौर पिछड़ों को परेशान कर रही है। इतना ही नहीं मायावती ने कहा कि भाजपा दलित अौर अल्प संख्यक विरोधी है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी संविधान की अवहेलना कर रही है।
जानकारी हो कि नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिजन (NRC) 1951 को अपडेट करने जैसे मुश्किल काम को अंजाम देने का श्रेय राज्य के प्रिंसिपल सेक्रेट्री (होम) प्रतीक हालेजा को दिया जा रहा है। प्रतीक इस बेहद मुश्किल काम के लिए स्टेट कॉर्डिनेटर की भूमिका में हैं और इसका पहला ड्राफ्ट 31 दिसंबर 2017 को जारी किया गया था जिसमें 3.29 करोड़ लोगों में केवल 1.9 करोड़ को भारत का वैध नागरिक माना गया था।
30 जुलाई 2018 को जारी दूसरे और आखिरी ड्राफ्ट में 3.29 करोड़ आवेदकों में 2.90 करोड़ को वैध नागरिक पाया गया। इसका मतलब हुआ कि इस फाइनल ड्राफ्ट में करीब 40 लाख लोगों के नाम नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि जिन 40 लाख से अधिक लोगों के नाम शामिल नहीं हैं, उनके खिलाफ प्राधिकार कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकते हैं क्योंकि अभी यह महज एक मसौदा भर है।