लखनऊ

गंभीर अपराधों के आरोपी पुलिस में नौकरी नहीं कर सकते, भले ही दोषसिद्ध न हुआ हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट

पुलिस भर्ती के एक अभ्यर्थी (Police Recruitment Candidate) की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट (High Court) ने अभ्यर्थी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि पुलिस सेवा (Police Service) के लिए निष्कलंक चरित्र अनिवार्य है।
2 min read
• •
Updated: 20 May 2026, 4:56 PM IST
Allahabad High Court
सांकेतिक इमेज

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ पीठ ने अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि गंभीर अपराधों के मामलों में आरोपी व्यक्ति को पुलिस जैसे अनुशासित बल में नियुक्ति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग मात्र नौकरी का माध्यम नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने वाली संवेदनशील सेवा है।

कोर्ट ने खारिज की पुलिस भर्ती अभ्यर्थी की याचिका

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की एकल पीठ ने शेखर नाम के पुलिस भर्ती अभ्यर्थी की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। शेखर ने दावा किया था कि उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमा दुर्भावनापूर्ण है। अभी तक उसकी दोषसिद्धि नहीं हुई है। इसलिए याची को पुलिस भर्ती से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने याची के तर्क को खारिज कर दिया है।

कोर्ट ने कहा- पुलिस सेवा के लिए निष्कलंक चरित्र अनिवार्य

पुलिस भर्ती के अभ्यर्थी शेखर की याचिका को कोर्ट ने रद्द कर दिया है। याचिका को रद्द करते हुए कोर्ट तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा- केवल दोषसिद्धि न होना किसी अभ्यर्थी को स्वतः नियुक्ति का अधिकार नहीं देता। पुलिस जैसी अनुशासित सेवा में चयन के लिए अभ्यर्थी का निष्कलंक चरित्र अनिवार्य है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध गंभीर आपराधिक आरोप लंबित हैं तो सक्षम प्राधिकारी उसके आचरण, पृष्ठभूमि और समग्र विश्वसनीयता का मूल्यांकन कर उसे नियुक्ति के लिए अनुपयुक्त ठहरा सकता है।

कोर्ट ने अपने निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय के कई अहम फैसलों का हवाला दिया। इन फैसलों में सरकारी सेवाओं, खासकर पुलिस और अन्य अनुशासित बलों में चरित्र सत्यापन ( Character Verification) की प्रक्रिया को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में राज्य को पूर्ण अधिकार है कि वह उन व्यक्तियों को सेवा में प्रवेश से रोक सके, जिनकी पृष्ठभूमि से विभाग की साख, अनुशासन और जनता के विश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो।

न्यायमूर्ति राय ने कहा कि पुलिस बल समाज में कानून का प्रवर्तन करने वाली प्रमुख संस्था है। यदि गंभीर आरोपों का सामना कर रहा व्यक्ति इस सेवा में शामिल हो जाता है, तो इससे न केवल विभाग का आंतरिक अनुशासन प्रभावित होगा, बल्कि आम जनता का पुलिस के प्रति विश्वास भी डगमगा सकता है। कोर्ट का यह फैसला पुलिस भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से भर्ती एजेंसियों को मजबूत आधार मिलेगा, जिससे अयोग्य तत्वों को सेवा में प्रवेश करने से रोका जा सकेगा।

Updated on:
20 May 2026, 4:56 PM IST
Published on: