
Dinesh Pratap Singh Hamid Ansari Statement: पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारीने दिवंगत संविधान विशेषज्ञ और लेखक ए.जी. नूरानी की किताब का जिक्र करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने बयान को याद किया। अंसारी ने कहा कि नेहरू ने भारत के लिए कम्युनिज्म की तुलना में हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को बड़ा खतरा बताया था। उन्होंने यह बात नई दिल्ली स्थित इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित तीसरे ए.जी. नूरानी मेमोरियल लेक्चर के दौरान कही। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान पर पलटवार किया है।
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता पर दिए बयान पर कहा, "पूर्व राष्ट्रपति हामिद अंसारी जब-जब मुंह खोलते हैं, तो विषवमन करने का काम करते हैं। पहले देश के मुसलमानों को डरा हुआ बता रहे थे और वो कह रहे थे कि देश में रहने से डर लगता है, लेकिन आज भी हामिद अंसारी इसी देश भारत में रह रहे हैं, आप किसी दूसरे देश में नहीं जाकर बस गए। आज फिर से आपने विषवमन करने का काम किया है। आप कह रहे हैं कि इस देश को हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिए जाने से खतरा है। आप हवाला जो हैं नेहरू जी के बयान से देते हैं। हामिद अंसारी साहब, इस देश को हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से खतरा नहीं है, इस देश को खतरा आप जैसे लोगों से है। इस देश को खतरा आप जैसे लोगों के द्वारा दिए गए बयानों से हो रहा है। मुझे लगता है आजकल आप राहुल गांधी से कोचिंग लेना शुरू कर दिए हैं।"
बता दें कि ए.जी. नूरानी के जीवन, उनके लेखन और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को याद करने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम का विषय ‘रिमेंबरिंग ए पॉलीमैथ: द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ अब्दुल गफूर नूरानी’ रखा गया था। अपने संबोधन में हामिद अंसारी ने नूरानी के लेखन और उनके विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने राष्ट्रवाद, पहचान, धर्मनिरपेक्षता और भारतीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर नूरानी के लेखन को याद किया। इसी दौरान उन्होंने नूरानी की चर्चित किताब The RSS: A Menace to India का भी जिक्र किया।
हामिद अंसारी ने कहा कि The RSS: A Menace to India ए.जी. नूरानी की संभवतः आखिरी बड़ी किताब थी। उन्होंने किताब की विषयवस्तु और उसके आकार, दोनों को महत्वपूर्ण बताया। अंसारी के मुताबिक, नूरानी ने किताब की प्रस्तावना में अपने वैचारिक उद्देश्य को स्पष्ट करने की कोशिश की थी। उन्होंने प्रस्तावना के संदर्भ में दो उर्दू शेरों का भी उल्लेख किया और बताया कि नूरानी ने अपने विचारों को सामने रखने के लिए साहित्यिक संदर्भों का इस्तेमाल किया था।
अपने भाषण के दौरान हामिद अंसारी ने पूर्व विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया द्वारा दर्ज किए गए जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने बयान का हवाला दिया। यह बयान विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक से जुड़ा बताया गया। अंसारी ने नूरानी की किताब की प्रस्तावना का संदर्भ देते हुए कहा कि नेहरू के अनुसार भारत के लिए असली खतरा कम्युनिज्म नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता था। अंसारी ने इसे नेहरू के पुराने कथन के तौर पर प्रस्तुत किया।
हामिद अंसारी ने अपने संबोधन में नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बीच अंतर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में ऐसे रुझान देखने को मिले हैं, जिन्हें वह नागरिक राष्ट्रवाद की स्थापित अवधारणा के लिए चुनौती के तौर पर देखते हैं। उन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की बढ़ती चर्चा का भी उल्लेख किया और कहा कि इन बदलावों के कुछ रूप भारत में कानून के शासन से जुड़े दावों को लेकर सवाल खड़े करते हैं। अंसारी ने ऐसे मुद्दों पर कानूनी और राजनीतिक स्तर पर बहस की जरूरत की बात कही।
इस कार्यक्रम में ए.जी. नूरानी के लेखन और उनके सार्वजनिक जीवन को याद करने के साथ-साथ राष्ट्रवाद, सांप्रदायिकता और भारत की राजनीतिक विचारधारा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। हामिद अंसारी द्वारा जवाहरलाल नेहरू के पुराने बयान का हवाला दिए जाने के बाद यह टिप्पणी राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है।