दरिंदों ने ब्लड कैंसर पीड़िता को बनाया अपनी हवस का शिकार, राहगीर ने भी मानवता को शर्मसार किया।
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में योगी सरकार और यूपी पुलिस की पहल पर महिलाओं और लड़कियों को सुरक्षित और जागरुक करने के लिए नारी सुरक्षा सप्ताह चलाया जा रहा था। लेकिन नारी सुरक्षा सप्ताह के आखिरी दिन ही लखनऊ में नाबालिग ब्लड कैंसर पीड़िता से गैंगरेप ने सुरक्षा के झूठे दावों को बेपर्दा कर दिया। असहाय कैंसर पीड़िता से देर रात बलात्कार और मदद मांगने पर राहगीर ने द्वारा फिर नाबालिग के साथ चंद घंटों में दोहराई गई रेप की घटना ने प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। इस मामले में अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन इस घटना ने उत्तर प्रदेश को अपराध के मामले में टॉप पर बताने वाली एनसीआरबी की रिपोर्ट पर मोहर लगा दी है।
इंसानियत को किया शर्मसार
ब्लड कैंसर 14 वर्षीय पीड़िता के साथ हुई वारदात ने उसे दिमागी रुप से भयंकर ट्रॉमा में पहुंचा दिया है। सरोजनी नगर रहने वाली पीड़िता घर से कुछ खाने के लिए निकली थी, लेकिन उसका परिचित शुभम (18) उसे बहका कर ले गया। इसके बाद उनसे निर्माणाधीन इमारत में जानकार सुमित के साथ मिलकर घंटों तक रेप किया। शनिवार देर रात नाबलिग को सड़क किनारे फेंककर फरार हो गए। इसके बाद नाबालिग ने किसी तरह बाइक से जा रहे शख्स को मदद के लिए रोका। वीरेंद्र नाम के उस इसान ने मानवता को शर्मसार करते हुए नाबालिग को पुलिस या परिवार तक पहुंचाने के बजाय उसके साथ हुई घटना जानकर खुद भी मौका देख दोबारा रेप किया और फरार हो गया।
तीनों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की तैयारी
नारी सुरक्षा सप्ताह के खत्म होते ही नाबालिग के साथ हुई इस वारदात की जानकारी मिलते ही यूपी पुलिस के अधिकारियों के होश उड़ गए। रविवार सुबह पीड़िता और उसके परिवार ने बिजनौर चौकी पर मौजूद पुलिस वालों को रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना बताई। इसके बाद रविवार को दिन खत्म होने से पहले पुलिस ने वीरेंद्र और फिर सुमित को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद सोमवार को मुख्य आरोपी शुभम को भी पुलिस ने पकड़ लिया। एसएसपी लखनऊ दीपक कुमार का कहना है कि अब तीनों के खिलाफ रेप, अपहरण, आईपीसी की अन्य धाराओं के साथ ही गैंगस्टर एक्ट में भी कार्रवाई की तैयारी है।
नहीं रुक रहा बलात्कार, बेटियां असुरक्षित
उत्तर प्रदेश पुलिस के डाटा के मुताबिक प्रदेश में 2017 में महज साढ़े दस महीने में ही 3,873 बलात्कार के मुकदमे दर्ज किए। यह डाटा 1 जनवरी से 15 नवंबर 2017 की अवधि का है। यूपी पुलिस प्रदेश में नारी सुरक्षा सप्ताह से लेकर कई मुहिम महिलाओं की सुरक्षा के लिए चला रही है। लेकिन हैरानी की बात है कि इसके बाद भी प्रदेश में हत्या, लूट, चोरी जैसे मामलों के केस बलात्कार जैसे घिनौने अपराध के पीछे आते हैं। प्रदेश में इस अवधि में हत्या के 3,847 मामले, लूट के 3663 मामले, चोरी 3,873 मामले और डकैती के 221 मामले दर्ज किए गए हैं। यहीं नहीं महिलाओं से जुड़े कुल अपराधों का आकड़ा 46,374 तक पहुंच गया है। अब 45 दिन के आकड़ों को जोड़ा जाए, तो दर्ज किए गए मामलों में और वृद्धि दिखेगी।
देश में प्रदेश स्तर पर यूपी और शहर में लखनऊ टॉप पर
देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दिसंबर माह में एनसीआरबी 2016 की रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर आता है। यहां आईपीसी के तहत सबसे ज्यादा 29,75,711 केस दर्ज हुए। जो कि देश भर में दर्ज हुए केस का यूपी 9.5 प्रतिशत हिस्सा साझा करता है। इसके बाद मध्य प्रदेश 8.9 प्रतिशत के साथ दूसरे नंबर पर, महाराष्ट्र और केरल 8.8 प्रतिशत व 8.7 प्रतिशत के साथ क्रमश: तीसरे और चौथे नंबर पर आते हैं।
महिलाओं से जुड़े अपराध के मामले में भी यूपी सबसे टॉप पर है। देश भर में महिलाओं के खिलाफ हुए 3,38,954 अपराधिक मामलों में यूपी 49,262 केस के साथ शीर्ष पर है।
वहीं शहर स्तर बात की जाए तो 2016 में लखनऊ में महिलाओं के खिलाफ हुए 2,205 मामले दर्ज किए। साल 2013 से 2016 के बीच लखनऊ में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में 43 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखी गई।
आरोपियों को मिले फांसी की सजा
महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाली उम्मीद संस्था की ज्वाइंट सेक्रेटरी अराधना सिंह सिकेरवाल ने कहा कि लखनऊ में हुई इस घटना से मानवता शर्मसार हुई है। पहले पीड़िता के साथ रेप हुआ, फिर जब उसने किसी तरह एक अन्य व्यक्ति से मदद मांगी उसने मदद करने के बाजाय उसका फायदा उठाया। ऐसे लोगों को फांसी से कम की सजा नहीं मिलनी चाहिए। यदि जल्द कोई कड़ा निर्णय नहीं लिया गया, तो ऐसी घटनाओं को रोकने में आगे और मुश्किल आएगी।