
गंगा एक्सप्रेसवे पर मुफ्त सफर खत्म, अब मेरठ से प्रयागराज यात्रा होगी महंगी पूरी तरह (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
UP Expressway Toll Tax: उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे और महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेस वे पर अब मुफ्त यात्रा का दौर समाप्त हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उद्घाटन के बाद 15 दिनों तक टोल फ्री यात्रा की सुविधा दी गई थी, जिसकी अवधि गुरुवार रात खत्म हो गई। इसके बाद शुक्रवार रात 12 बजे से एक्सप्रेस वे पर आधिकारिक रूप से टोल वसूली शुरू कर दी गई।
उप्र एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि टोल वसूली की सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई थीं। अब एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों को तय दूरी के हिसाब से शुल्क देना होगा। प्रदेश के विकास की नई पहचान बन चुके 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर अत्याधुनिक तकनीक के जरिए टोल वसूली की जा रही है, जिससे वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को बड़ी राहत देते हुए 15 दिनों तक टोल शुल्क न लेने की घोषणा की थी। इस फैसले के बाद हजारों लोगों ने मुफ्त यात्रा का लाभ उठाया। एक्सप्रेस वे पर लगातार वाहनों की आवाजाही बढ़ती रही और लोगों ने आधुनिक सड़क सुविधा का अनुभव किया। हालांकि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद अब टोल वसूली शुरू कर दी गई है।
यूपीडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) हरि प्रताप शाही ने बताया कि गुरुवार रात 12 बजे से एक्सप्रेस वे पर टोल कलेक्शन शुरू कर दिया गया। उन्होंने कहा कि टोल वसूली के लिए सभी तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्थाएं पहले ही पूरी कर ली गई थीं। वाहन चालकों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए आधुनिक सिस्टम का उपयोग किया गया है।
गंगा एक्सप्रेसवे पर क्लोज्ड टोल सिस्टम लागू किया गया है। इसका मतलब है कि वाहन चालक जितनी दूरी तय करेंगे, उतना ही शुल्क देना होगा। यदि कोई वाहन चालक एक्सप्रेसवे पर कम दूरी तक यात्रा करता है, तो उसे केवल उसी दूरी का टोल देना होगा।इस प्रणाली को पारदर्शी और यात्रियों के लिए सुविधाजनक माना जा रहा है।
गंगा एक्सप्रेसवे पर पहली बार अत्याधुनिक मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस तकनीक के तहत वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। कैमरे और सेंसर वाहन की एंट्री और एग्जिट को रिकॉर्ड करेंगे और उसी आधार पर टोल की गणना की जाएगी। इससे समय की बचत होगी और लंबी कतारों की समस्या भी खत्म हो जाएगी।
यूपीडा द्वारा जारी दरों के अनुसार विभिन्न वाहनों के लिए अलग-अलग टोल दरें तय की गई हैं।
कार, जीप और वैन जैसे हल्के वाहनों के लिए टोल दर ₹2.55 प्रति किलोमीटर निर्धारित की गई है। यदि कोई वाहन चालक मेरठ से प्रयागराज तक पूरे 594 किलोमीटर का सफर करता है, तो उसे लगभग ₹1795 टोल देना होगा।
बस और ट्रक जैसे भारी वाहनों के लिए टोल दर ₹8.20 प्रति किलोमीटर तय की गई है। ऐसे में पूरे एक्सप्रेस वे पर सफर करने वाले भारी वाहनों को काफी अधिक शुल्क चुकाना पड़ेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेस वे माना जा रहा है। करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस वे मेरठ से प्रयागराज तक बनाया गया है। यह एक्सप्रेस वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी हिस्से से जोड़ने का काम करेगा और यात्रा समय में भारी कमी लाएगा।
गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए प्रदेश के कई बड़े जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। यह एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे जिलों से होकर गुजरता है। इससे व्यापार, उद्योग, पर्यटन और परिवहन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
सूत्रों का मानना है कि गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा। बेहतर सड़क संपर्क के कारण माल परिवहन आसान होगा और लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी। इसके अलावा औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
गंगा एक्सप्रेस वे पर वाहन चालक तेज और सुरक्षित यात्रा का अनुभव कर सकेंगे। बेहतर सड़क गुणवत्ता, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था और हाईस्पीड कॉरिडोर की वजह से यात्रा समय काफी कम हो जाएगा। मेरठ से प्रयागराज तक का सफर पहले की तुलना में कई घंटे कम समय में पूरा किया जा सकेगा।
टोल वसूली शुरू होने के बाद लोगों की प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है। कुछ लोगों का कहना है कि आधुनिक सुविधाओं और बेहतर सड़क के लिए टोल देना उचित है। वहीं कई यात्रियों का मानना है कि टोल दरें काफी ज्यादा हैं और लंबी दूरी की यात्रा महंगी हो जाएगी।
गंगा एक्सप्रेसवे पर डिजिटल टोल सिस्टम लागू होने के कारण फास्टैग का उपयोग जरूरी माना जा रहा है। बिना फास्टैग वाले वाहनों को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। यूपीडा ने वाहन चालकों से समय रहते अपने फास्टैग सक्रिय कराने की अपील की है।
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। यमुना एक्सप्रेस वे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेस वे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के बाद अब गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश की नई पहचान बन रहा है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश को देश का सबसे मजबूत एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाला राज्य बनाना गंगा एक्सप्रेसवे पर मुफ्त सफर खत्म, अब मेरठ से प्रयागराज यात्रा होगी महंगी पूरी तरह
Updated on:
15 May 2026 06:20 pm
Published on:
15 May 2026 06:19 pm
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