कितना सफल होगा ‘आयरन लेडी’ का प्रहार ?

नोटबंदी को लेकर बसपा संसद से सड़क तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ हमलावर हो गई हैं। वे मौका मिलते ही मोदी सरकार और नोटबंदी पर तीखा हमला कर रही हैं। केवल मोदी सरकार ही नहीं वे प्रदेश की समाजवादी सरकार और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर भी हमला बोलने से नहीं चूक रहीं हैं।

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Dec 16, 2016
probability of alliance in up election
राघवेन्द्र प्रताप सिंह
लखनऊ. चुनावी मौसम में राजनीतिक दलों के लिए नोटबंदी जहां परेशानी का सबब बना हुआ है वहीं मायावती इसे एक अवसर के रूप में देख रही हैं। नोटबंदी को लेकर बसपा संसद से सड़क तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ हमलावर हो गई हैं। वे मौका मिलते ही मोदी सरकार और नोटबंदी पर तीखा हमला कर रही हैं। केवल मोदी सरकार ही नहीं वे प्रदेश की समाजवादी सरकार और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर भी हमला बोलने से नहीं चूक रहीं हैं। इन तीखे हमलो से मायावती अपनी छवि को निखारने के क्रम में एक बार फिर अपने को यूपी की आयरन लेड़ी साबित करने का प्रयास किया।
राहुल को अनुभवहीन और अखिलेश को बबुआ साबित करने में जुटी माया
यूपी की सत्ता में लौटने के लिए बसपा प्रमुख मायावती अब सूबे में राहुल गांधी को अनुभवहीन नेता और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को राजनीतिक बबुआ साबित करने में जुट गई हैं। मायावती कहती हैं कि मुलायम हकीकत जानते हैं इसलिए गठबंधन के लिए इधर-उधर मारे-मारे घूम रहे हैं। वो कहती हैं कि अखिलेश यादव (बबुआ) किसी को चाचा बोलता है, किसी को बाबा बोलता है। किसी को बुआ बोलता है, किसी को माता बोलता है। सबके पैर छूता है। हालत बहुत ज्यादा खराब है। ऐसे में वो प्रदेश कैसे चलाएगा ?

राहुल और अखिलेश को थोपा हुआ नेता मानती हैं
मायावती कहती हैं कि देश और प्रदेश की जनता राहुल गांधी और अखिलेश यादव को थोपा हुआ नेता मानती है। उनको लगता उनकी यह मुहिम सफल होगी और आगामी चुनावों में बसपा को इसका लाभ मिलेगा। अपनी इसी सोच के तहत उन्होंने बीते दिनों अखिलेश यादव पर तीखा हमला किया और अखिलेश को बबुआ कह दिया। मायावती के कहती हैं कि विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी सूबे की सत्ता पर काबिज होने वाली नहीं है। ये बता मुलायम सिंह और अखिलेश यादव को भी पता है। मायावती कहती हैं कि यह जानते हुए भी मुलायम और अखिलेश गठबंधन के लिए इधर-उधर घूम रहे हैं।

तो वापस लौट सकते थे अखिलेश
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बबुआ बताते हुए मायावती ये कहने से भी नहीं चूकतीं की यदि बतौर अपने पिता, चाचा और ताऊ लोगों के इशारे पर न नाचते और यूपी की कानून-व्यवस्था को ठीक करने में जुटते तो या फिर नोटबंदी से परेशान लोगों की मदद करता तो उनकी हालत इतनी खराब नहीं होती। यूपी की जनता अखिलेश को तेजतर्रार नेता मानती न की पिता, चाचा और ताए के इशारे पर चलते वाला बबुआ । मायावती कहती हैं कि यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में अखिलेश यादव ने बसपा शासनकाल में तय हुई मेट्रो और यमुना एक्सप्रेस वे जैसी परियोजनाओं को अपनी उपलब्धि बता रहा है। अखिलेश ने यूपी के विकास से संबंधित कोई परियोजना नहीं शुरू की। अखिलेश को यूपी की जमीनी हकीकत का पता ही नहीं है।

गलत लोगों के बीच फंसे हैं राहुल
मायावती ऐसा ही हमला राहुल गांधी पर भी करती हैं। मायावती के अनुसार राहुल अपरिपक्व नेता हैं, राहुल जिन नेताओं से घिरे हैं उनका जनता की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है इसलिए वे लोग उनको सही जानकारी नहीं देते। जिसके चलते राहुल गांधी ने नोटबंदी की समस्याओं से जुझ रहे लोगों के मन की बात नहीं जान सके। संसद के बाहर हास्यास्पद बयानबाजी करते रहे।

राहुल ने गरीबी देखी ही कहां हैं
बसपा महासचिव नसीमुददीन सिददीकी कहते हैं मीडिया में प्रचार पाने के लिए सुरक्षा बलों की मौजूदगी में कुछ देर झोपड़ी में गुजारने वाले कांग्रेस के युवराज ने गरीबी देखी ही कहां है? वह तो पंचतारा सुविधाओं में पले-बढ़े हैं और आज भी उसी माहौल में रह रहे हैं। ऐसे युवराज के हाथों में कांग्रेस की बागडोर सौंप देने के लिए कांग्रेसी व्याकुल हैं। जबकि अखिलेश यादव अभी राजनीति की एबीसीडी सीख रहे हैं। वे खुद कहते हैं कि अभी लर्निंग पर हैं। जनता जानती है कि इन नेताओं की मायावती से तुलना हो ही नहीं सकती। यही बात अब बसपा के कार्यकर्ता यूपी के गांव गांव में लोगों को बता रहे हैं। ताकि सूबे की जनता राहुल और अखिलेश के झांसे में न आए।
Published on:
16 Dec 2016 05:37 pm
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