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India sugar export restriction: मोदी सरकार ने चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से 30 सितंबर, 2026 तक या अगले आदेश तक रोक लगा दी है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक अधिसूचना जारी कर निर्यात नीति को 'प्रतिबंधित' से बदलकर 'निषिद्ध' कर दिया है। यह रोक EU और USA को CXL और TRQ कोटे के तहत, एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (AAS) के तहत, और अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सरकार-से-सरकार शिपमेंट के जरिए किए जाने वाले चीनी निर्यात पर लागू नहीं होगी। जो खेप पहले से ही निर्यात की प्रक्रिया में हैं, उन्हें भी इस रोक से छूट दी गई है।
भारत जहां दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। इसके अलावा ब्राजील के बाद भारत दुनिया के दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। इसलिए भारत के इस फैसले का असर वैश्विक स्तर पर पड़ सकता है।
न्यूयॉर्क में जहां चीनी के वायदा भाव 2 प्रतिशत बढ़ गए हैं, वहीं लंदन में सफेद चीनी के दामों में 3 प्रतिशत का उछाल आया है। भारत के इस फैसले से प्रतिद्वंदी उत्पादकों ब्राजील और थाइलैंड को फायदा मिल सकेगा। ये दोनों देश अफ्रीका और एशियाई खरीदारों को अधिक चीन भेज सकेंगे।
भारत ने अपनी घरेलू जरूरतों से ज्यादा उत्पादन होने की उम्मीद के चलते सरकार ने चीनी मिलों को 15 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। हालांकि अब आशंका जताई जा रही है कि प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कमजोर फसल के कारण चीनी उत्पादन लगातार दूसरे साल घरेलू खपत से कम रह सकता है।
अल नीनो की वजह से इस साल भारत में मानसून पर खतरा है। ऐसे में मोदी सरकार को देश में चीनी उत्पादन कम होने का अनुमान है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने समय रहते चीन के निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी सरकार के फैसले से आने वाले महीनों में घरेलू बाजार में चीनी के दाम फिलहाल स्थिर बने रह सकते हैं। हालांकि, यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है, तो सरकार को अतिरिक्त सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।
Updated on:
14 May 2026 08:35 am
Published on:
14 May 2026 07:28 am
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