UP news: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे की रिपोर्ट जारी हुई है। इसके अंतर्गत मुसलिम समुदाय के महिलाएं भी कम बच्चों के फेवर में हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय हर पांच साल पर राष्ट्रीय स्तर पर सर्वे कराता है। इसमें जन्म दर, मृत्यु दर, प्रजनन दर आदि के आंकड़े शामिल किए जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में पिछले पांच वर्षों में हिंदू महिलाओं की अपेक्षा मुस्लिम महिलाओं की प्रजनन दर में ज्यादा गिरावट आई है। वहीं, सिख महिलाओं की प्रजनन दर बढ़ी है। वर्ष 2015-16 के बीच हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 की रिपोर्ट के आधार पर हिंदू महिलाओं की प्रजनन दर 2.67, मुस्लिम की 3.10, सिख की 1.38 और अन्य की 1.75 थी। रिपोर्ट के लेकर पूर्व महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. बद्री विशाल ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर मुस्लिमों में शैक्षिक विकास की गति तेज हुई है। वहीं, अनुसूचित जनजाति में सर्वाधिक गिरावट है। वजह है कि वे जंगल से निकलकर सर्व समाज के बीच पहुंच रहे हैं।
पिछले आंकड़ों में ये थी स्थिति
वर्ष 2019-21 यानी एनएफएचएस 5 में हिंदू महिलाओं की प्रजनन दर 2.29, मुस्लिम की 2.66, सिख की 1.45 और अन्य की 2.83 हो गई। यानी वर्ष 2015-16 के मुकाबले वर्ष 2019-21 हिंदू महिलाओं की प्रजनन दर में 0.38 और मुस्लिम की 0.44 की गिरावट हुई। जबकि सिख महिलाओं की प्रजनन दर में 0.07 और अन्य में 1.08 की बढ़ोतरी हुई है।
मुस्लिम समुदाय में जागरूकता
जारी रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष मुस्लिम समुदाय के आंकड़ों में गिरावट आई है। यानि अब मुस्लिम महिलाएं भी कम बच्चों पर जोर दे रही हैं। प्रजनन दर में तेज गिरावट दिख रही है। सिखों व अन्य वर्ग में प्रजनन दर की बढ़ोतरी के अलग-अलग कारण हैं। जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों जनसंख्या नियंत्रण की अपील की जा सकता है।
ये है जातिवार स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार जातीय स्थिति देखें तो अनुसूचित जाति का प्रजनन दर 3.09 से घटकर 2.57, अनुसूचित जनजाति का 3.61 से घटकर 2.72, ओबीसी का 2.76 से 2.35 और सामान्य का 2.28 से घटकर 2.03 पर आ गया है। यानि सर्वाधिक 0.59 की गिरावट अनुसूचित जनजाति में हुई है, जबकि सबसे कम 0.25 की सामान्य वर्ग में हुई है।