दीपावली के दिन माता लक्ष्मी व गणेश जी की पूजा की जाती है।
लखनऊ. दीपावली का त्योहार 18 अक्टूबर को बड़े धूम धाम से मनाया जाएगा। दीपावली के दिन माता लक्ष्मी व गणेश जी की पूजा की जाती है। लेकिन क्या आपको पता है की इस दिन दीपावली के दिन काली माता की पूजा करना शुभ माना जाता है। दीपावली के दिन यानि कार्तिक मास की अमावस्या को श्रद्धाभाव और मनोयोग से अर्द्धरात्रि में मां काली की पूजा की जाती है। ज्यादातर बंगाली समाज में इस पूजा का खास महत्व है। इसे श्यामा पूजा के नाम से भी जाना जाता है।
ऐसे करें मां काली की पूजा
लखनऊ के इंदिरा नगर के रहने वाले आचार्य अशोक कुमार पाण्डेय ने बताया कि अगर मां काली पुरे विधि-विधान से पूजन की जाए तो मां काली अपने भक्तों से बहुत प्रसन्न हो जाती हैं। माता काली की पूजा करने के साथ 'ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै' मंत्र का जाप करना चाहिए। आइये पंडित जी से जानते हैं श्रीमहाकाली साधना से क्या क्या होते हैं लाभ-
महाकाली साधना करने वाले जातक को निम्न लाभ स्वत: प्राप्त होते हैं-
जिस प्रकार अग्नि के संपर्क में आने के पश्चात् पतंगा भस्म हो जाता है, उसी प्रकार काली देवी के संपर्क में आने के उपरांत साधक के समस्त राग, द्वेष, विघ्न आदि भस्म हो जाते हैं।
श्री महाकाली स्तोत्र एवं मंत्र को धारण करने वाले धारक की वाणी में विशिष्ट ओजस्व व्याप्त हो जाने के कारणवश गद्य-पद्यादि पर उसका पूर्व आधिपत्य हो जाता है।
महाकाली साधक के व्यक्तित्व में विशिष्ट तेजस्विता व्याप्त होने के कारण उसके प्रतिद्वंद्वी उसे देखते ही पराजित हो जाते हैं। काली साधना से सहज ही सभी सिद्धियां प्राप्त हो जाती है।
काली का स्नेह अपने साधकों पर सदैव ही अपार रहता है। तथा काली देवी कल्याणमयी भी है। जो जातक इस साधना को संपूर्ण श्रद्धा व भक्तिभाव पूर्वक करता है वह निश्चित ही चारों वगरें में स्वामित्व की प्राप्ति करता है व मां का सामीप्य भी प्राप्त करता है।
साधक को मां काली असीम आशीष के अतिरिक्त, श्री सुख-सम्पन्नता, वैभव व श्रेष्ठता का भी वरदान प्रदान करती है। साधक का घर कुबेरसंज्ञत अक्षय भंडार बन जाता है।
काली का उपासक समस्त रोगादि विकारों से अल्पायु आदि से मुक्त हो कर स्वस्थ दीर्घायु जीवन व्यतीत करता है। काली अपने उपासक को चारों दुर्लभ पुरुषार्थ, महापाप को नष्ट करने की शक्ति , सनातन धर्मी व समस्त भोग प्रदान करती है।
इस मंत्र के जाप से दूर होते हैं कष्ट
पौराणिक मान्यता के अनुसार, 'ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै' यह मंत्र मां काली के स्वरूप को समर्पित है। इसका हर अक्षर ग्रहों को नियंत्रित करते हैं। मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
पूजा करने से पहले करें ये काम
इसके लिए घर में देवी काली की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। भोर में ही स्नान कर लें। साफ-स्वच्छ कपड़े पहनकर मां की प्रतिमा के सामने दीप जलाएं। फिर लाल गुड़हल के फूल समर्पित करें। इसके बाद आसन पर बैठकर इस मंत्र का 108 बार जाप करें। मां को इस मौके पर भोग अर्पण करना भी जरूरी होता है।
श्रीमहाकाली पाठ-पूजन विधि-
सबसे पहले गणपति का ध्यान करते हुए समस्त देवी-देवताओं को नमस्कार करें। और इन मंत्रों के साथ काली मां की पूजा करें।
1. श्री मन्महागणाधिपतये नम:।।
2. लक्ष्मीनारायणाभ्यां नम:।।
3. उमामहेश्वरा्भ्यां नम:।।
4. वाणीहिरण्यगर्भाभ्यां नम:।।
5. शचीपुरन्दराभ्यां नम:।।
6. मातृपितृ चरणकमलेभ्यो नम:।।
7. इष्टदेवताभ्यो नम:।।
8. कुलदेवताभ्यो नम:।।
9. ग्रामदेवताभ्यो नम:।।
10.वास्तुदेवताभ्यो नम:।।
11. स्थानदेवताभ्यो नम:।
12. सर्वेभ्यो देवेभ्यो नम:।।
13. सर्वेभ्यो ब्राह्यणेभ्यो नम:।।
ऊं भूर्भुव स्व:।
तत् सवितुर्वरेण्यम्।। भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो न: प्रचोयदयात्।।
एते गन्धपुष्पे पुष्प अर्पण करते समय निम्न मंत्रों का उच्चारण करें-
ऊं गं गणपतये नम:।
आदित्यादिनवग्रहेभ्यो नम:।।
ऊं शिवादिपंचदेवताभ्यो नम:।।
ऊं इन्द्रादिदशदिक्पालेभ्यो नम:।।
ऊं मत्स्यादिदशावतारेभ्यो नम:।।
ऊं प्रजापतये नम:।।
ऊं नमो नारायणाय नम:।।
ऊं सर्वेभ्यो देवेभ्यो नम:।।
श्री गुरुवे नम:।।
ऊं ब्रह्माणेभ्यो नम:।।
निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए दाहिने हाथ की मध्यमा में या कलाई पर घास को बांधें-
ऊं कुशासने स्थितो ब्रह्मा कुशे चैव जनार्दन:।
कुशे ह्याकाशवद् विष्णु: कुशासन नमोऽस्तुते।।
आचमन करते समय निम्न मंत्रों का उच्चारण करें-
ऊं केशवाय नम:
ऊं माधवाय नम:।।
ऊं गोविन्दाय नम:।।
ऊं विष्णु: विष्णु: विष्णु;।।
ऊं ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके नम:।