
अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर कसा तंज, PC- IANS
लखनऊ : योगी सरकार ने 1.70 लाख शिक्षामित्रों और 24 हजार अनुदेशकों के वेतनमान में बढ़ोत्तरी की है। अब इस महीने से शिक्षामित्रों को 18,000 रुपये और 24 हजार अनुदेशकों को 17,000 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलेगा। अब इस मामले पर अखिलेश यादव ने निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने X पर पोस्ट करते हुए लिख कर भाजपा पर तीखा हमला बोला है।
अखिलेश यादव ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, भाजपा सरकार ने 9 साल शिक्षामित्रों का हक़ मारा और अब बढ़ाया भी तो भी सपा सरकार से 22 हजार कम है। अब जब भाजपा सरकार का परमानेन्ट रिटायरमेंट होनेवाला है तब ये शिक्षामित्रों के प्रति सहानुभूति दिखा रहे हैं। भाजपा सरकार द्वारा प्रताड़ित शिक्षामित्र भी पीड़ित की श्रेणी में आते हैं इसीलिए वो भी ‘पीडीए’ हुए और वो भी भाजपा को हराएंगे और पीडीए सरकार बनाएंगे। जो पीड़ित, वो पीडीए! पर शिक्षामित्र चिंता न करें : बुरे दिन जानेवाले हैं।
समाजवादी पार्टी की सरकार (2014) ने उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा नियमावली में संशोधन करके लगभग 1.72 लाख शिक्षामित्रों को बिना TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास किए सीधे 'सहायक अध्यापक' के पद पर समायोजित (पक्का) कर दिया था। इस फैसले को स्नातक बेरोजगारों और TET पास अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
12 सितंबर 2015 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने शिक्षामित्रों के इस समायोजन को असंवैधानिक घोषित कर दिया। कोर्ट का तर्क था कि बिना आवश्यक योग्यता (TET) के किसी को नियमित शिक्षक नहीं बनाया जा सकता। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यू.यू. ललित की पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य बिंदु थे। शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक के रूप में समायोजन पूरी तरह रद्द कर दिया गया। उन्हें वापस उनके मूल पद 'शिक्षामित्र' पर भेज दिया गया और मानदेय 10,000 रुपये तय हुआ। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि आने वाली दो बड़ी शिक्षक भर्तियों (68,500 और 69,000 पद) में शिक्षामित्रों को वेटेज (भारांक) दिया जाए ताकि वे अपनी योग्यता साबित कर पक्की नौकरी पा सकें।
कट-ऑफ अंकों को लेकर शिक्षामित्र दोबारा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। 18 नवंबर 2020 को कोर्ट ने सरकार के पक्ष (60/65% कट-ऑफ) में फैसला सुनाया, जिससे कई शिक्षामित्र दौड़ से बाहर हो गए। हालांकि, कोर्ट ने सरकार को एक और भर्ती परीक्षा आयोजित करने का सुझाव दिया था।
1.70 लाख शिक्षामित्रों और 24 हजार अनुदेशकों को इसी महीने से 18 हजार और 17 हजार रुपए वेतन मिलेगा। यूपी सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के वेतनमान में 8-8 हजार रुपए की वृद्धि की है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि, आप सिर्फ बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दीजिए। बाकि का काम हमारी सरकार देख लेगी। उन्होंने कहा हमारी सरकार ने शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोईयां के लिए 5 लाख रुपए तक के कैशलेस इलाज की व्यवस्था की है।
गौरतलब है कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में शिक्षामित्रों की समस्या के विधिक समाधान का वादा किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन रद्द हो गया था, जिसके बाद सरकार ने उनका मानदेय 3500 रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये प्रतिमाह किया था। इसके बाद से अब तक मानदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई थी। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों द्वारा समय-समय पर यह मुद्दा सदन में उठाया जाता रहा है।
Updated on:
07 Apr 2026 07:26 pm
Published on:
07 Apr 2026 07:24 pm
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