लखनऊ नगर निगम स्मार्ट सिटी की अगली बैठक 30 अक्टूबर को होगी
लखनऊ। आज बेशक साउथ अफ्रीका की डरबन सिटी काफी एडवांस और डवलेप्ड हो लेकिन एक समय था जब लखनऊ और डरबन सिटी का हाल एक जैसा ही था। यह कहना है नगर निगम की कंसलटेंट फर्म डेटा वर्ल्ड के मुख्य सलाहकार माइकल सटक्लिफ़ का। फीफा वर्ल्ड कप के लिए डरबन को स्मार्ट सिटी में तब्दील करने वाले सिटी मैनेजर माइकल ने लखनऊ को भी स्मार्ट सिटी बनाने का दावा किया है। उनका मानना है कि लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाना डरबन से भी आसान होगा।
क्या थीं समानताएं?
उन्होंने बताया कि जिस समय डरबन को स्मार्ट सिटी में तब्दील करने की कवायद की जा रही थी उस समय डरबन में भी सड़कों पर अतिक्रमण और यातायात की समस्या थी। वहां भी स्मार्ट सिटी के बनने के बाद गरीबों को फ्री बिजली-पानी जैसी मूल सुविधाएं दी गई थीं। इसी उम्मीद से लखनऊ को भी स्मार्ट सिटी में तब्दील किया जा रहा है।
स्मार्ट सिटी के लिए चाहिए होंगे स्मार्ट सॉल्यूशन
माइकल का मानना है कि सिर्फ रोड के चौड़ीकरण या फ्लाईओवर बनाने से सिटी स्मार्ट नहीं बनेगी। हमे स्मार्ट उपाय अपनाने होंगे। शहर भर में पार्किंग तो है पर पार्किंग से रास्ता कनेक्टेड नहीं है। यदि पार्किंग को अंडरपास से जोड़ दें और उनमें कुछ दुकानें दे दी जाएं तो पार्किंग में भी लोग गाड़ी खड़ी कर सकेंगे। साथ ही ख़राब मौसम में भागना नहीं पड़ेगा। इससे सुरक्षा के साथ कम जगह में ज्यादा व्यापार का फायदा लोग ले पाएंगे।
इस सुझाव पर अपर नगर आयुक्त विशाल भारद्वाज ने कहा कि हज़रतगंज में 3 अंडरपास का निर्माण किया जाएगा। यह अंडरपास सीसीडीए कैथेड्रल और जीपीओ को जोड़ेगा। इनका निर्माण मेट्रो के कार्य के साथ करवाया जाएगा।
वैसे तो डरबन सिटी लखनऊ के मुकाबले जनसंख्या और एरिया दोनों में कम है, फिर भी माइकल का मानना है कि लखनऊ को काफी आसानी से स्मार्ट बनाया जा सकता है। लखनऊ में मेट्रो रेन वॉटर हार्वेस्टिंग स्टेडियम और वेस्ट मैनेजमेंट पर पहले से ही काम चल रहा है जिसे मदद मिलेगी।