सात सौ साल पुराने इस मन्दिर में दर्शन मात्र से पूरी होती है हर मुराद

मां दुर्गा की भक्ति में डूबे लोग पूजा अर्चना के साथ जय मां शेरावाली के नारे लगाते नजर आए

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Oct 13, 2015
badi kali mandir
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लखनऊ.
नवरात्र के पहले दिन राजधानी के मंदिरों में देवी भक्तों की लम्बी कतारें देखी गईं। मां दुर्गा की भक्ति में डूबे लोग पूजा अर्चना के साथ जय मां शेरावाली के नारे लगाते नजर आए।


इसी कड़ी में देवी दर्शन करने के लिए राजधानी के नौ मशहूर मंदिरों में से एक चौक स्थित बड़ी काली माता मंदिर में लोगों का भारी सैलाब उमड़ा। इस मंदिर का इतिहास सात सौ साल पुराना है। बताया जाता है कि शंकराचार्य ने माता की मूर्ति कि स्थापना की थी, जिस काली मां को हम पूजते हैं वो असली में लक्ष्मी-विष्णु की मूर्ति है।



समाजिक कार्यकर्त्ता रिधि गौर ने बताया कि मुगलों ने जब इस मंदिर पर धावा बोला था तो यहां के पंडितों ने यहां स्थापित मूर्ति को बचाने के लिए उसे एक कुएं में फेंक दिया था, जिसकी वजह से हमारी धरोहर तो बच गई, लेकिन देवी कि मूर्ति की जगह लक्ष्मी -विष्णु कि विग्रह मूर्ति की स्थापना कि गई। आज जिस मूर्ति को हम माता काली की मूर्ति समझ के पूजा करते हैं वो लक्ष्मी -विष्णु हैं।



उन्होंने बताया कि इस मंदिर में एक बेशकीमती अष्टधातु की मूर्ति भी है जो दशमी के दिन निकाली जाती है। वे कहती हैं कि दशमी के दिन राज्यपाल ही इस मूर्ति को निकालते हैं और विधि-विधान से पूजा करने के बाद उसे फिर रख दिया जाता है, लेकिन पिछले पांच-छह साल से इस मूर्ति को निकाला ही नहीं गया है क्यों की इस ओर किसी का ध्यान ही नहीं गया है।


Published on:
13 Oct 2015 05:52 pm