- Ganga Dussehra 2021: गंगा से छानकर निकाले जा रहे शव, किया जा रहा है अंतिम संस्कार- प्रदूषण का खतरा टालने और गंगा की निर्मलता बनाए रखने की पहल
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
प्रयागराज. Ganga Dussehra 2021: गंगा दशहरा 20 जून को है। लेकिन इस साल गंगा की पवित्रता पर संकट है। प्रदूषण इतना है कि प्रयागराज से वाराणसी तक गंगा का पानी हरा हो गया है। हरा शैवाल इसके लिए जिम्मेदार बताया गया है। इसके अलावा अब बारिश ने गंगा की निर्मलता को और धूमिल कर दिया है। महीने भर पहले कोरोना की वजह से हुई मौतों के बाद गंगा तट पर रेत में दफनाए गए शव बारिश के बाद बाहर दिखने लगे हैं। रेत की कटान और जलस्तर बढऩे से रेत में दबी लाशों ऊ पर आ गयी हैं। इससे जल प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है। गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए अब इन शवों को गंगा से छानकर फिर विधिवत अंतिम संस्कार किया जा रहा है।
हर घाट पर निकल रहे शव
गंगा नदी में जगह-जगह रेत में शव दफनाए गए थे। महीनें पुराने शवों अब दुर्गंध उठ रही है, उनसे संक्रमण का भी डर बना हुआ है। कोरोना काल में गंगा किनारे बड़ी संख्या में दफनाए गए शवों से बारिश के मौसम में प्रदूषण का खतरा बढऩे का अंदेशा है। अंतिम संस्कार की पर्याप्त व्यवस्था न होने से प्रयागराज के फाफामऊ, छतनाग जैसे घाटों पर सैकड़ों शवों को रेत में दफना दिया गया था। लेकिन अब बारिश के बाद फाफामऊ घाट पर रेत से शवों के मिलने का सिलसिला जारी है। कहा जा रहा है कि यह सभी शव कोरोना संक्रमितों के हैं, जिन्हें जलाने की बजाए रेत में ही दबा दिया गया था। गंगा का जलस्तर बढऩे पर शव उतरा कर बह सकते हैं और इससे दशाश्वमेध, रामघाट से लेकर संगम और इससे आगे की धारा में भी गंगाजल प्रदूषित होगा।
अभी दबे हैं सैकड़ों शव
नगर निगम के जोनल अधिकारी नीरज कुमार सिंह का कहना है कि अकेले फाफामऊ घाट पर पचासों की संख्या में शव अभी रेत में दबे पड़े हैं। तट से महज दो से तीन फीट की दूरी पर दबे इन शवों के किसी भी समय गंगा में बहने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
शवों के अंतिम संस्कार में लोग आ रहे आगे
प्रयागराज में गंगा की कटान से बाहर आ रहे दफन शवों का अब विधिवत अंतिम संस्कार करने में लोग आगे आ रहे हैं। यहां की मेयर अभिलाषा नंदी भी इस काम में जुटी हैं। गंगा नदी में बाढ़ की कटान में कब्र से बाहर निकल आये रेत में दफनाये गए 25 शवों का अब तक अंतिम संस्कार कराया जा चुका है। मेयर का कहना है कि रेत में दफनाये गए शवों के गंगा में प्रवाहित होने से प्रदूषण हो सकता है इसलिये ये हम सबकी जिम्मेदारी है कि इन शवों का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और रीति रिवाज के साथ किया जाये।