Karnataka Elections 2023: मायावती ने कर्नाटक चुनाव में अकेले जाने का फैसला लिया है। उनके सामने अच्छे प्रदर्शन की चुनौती है।
कर्नाटक में हो रहे विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी अकेले दम पर लड़ेगी। पार्टी प्रमुख मायावती ने इसका ऐलान कर दिया है। बसपा ने कर्नाटक के बीते चुनाव में काफी दम दिखाया था। ऐसे में इस बार उसके सामने चुनौती कड़ी है।
बसपा ने JDS के साथ मिलकर लड़ा था 2018 का चुनाव
कर्नाटक में 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में बसपा का जेडीएस के साथ गठबंधन था। इस चुनाव में बीजेपी ने 104 सीट, कांग्रेस ने 78 और जेडीएस ने 37 सीटें जीती थीं। बहुजन समाज पार्टी को एक सीट पर जीत मिली थी। चामराजनगर जिले की कोल्लेगल सीट से एन महेश ने बसपा के टिकट पर जीत हासिल की थी।
चुनाव में एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत ना होने की स्थिति में जेडीएस ने कांग्रेस की मदद से सरकार बनाई थी। जेडीएस के कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने थे। इस सरकार में बसपा भी सहयोगी थी।
यूपी के बाहर पहली बार बना था बसपा का मंत्री
कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस की सरकार में बसपा के अकेले विधायक एन महेश भी मंत्रिमंडल में शामिल किए गए थे। जून, 2018 में एन महेश को कर्नाटक का प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री बनाया गया था। इसके साथ ही एक रिकॉर्ड बना। ये पहला मौका था जब बसपा का विधायक उत्तर प्रदेश के बाहर किसी सरकार में मंत्री बना।
एन महेश की मिनिस्ट्री हालांकि ज्यादा नहीं चली। करीब 5 महीने बाद ही उन्होंने एचडी कुमारस्वामी सरकार से इस्तीफा दे दिया। करीब 14 महीने सरकार चली। इसके बाद कांग्रेस-JDS के कई विधायक भाजपा के पाले में चले गए। इससे कुमारस्वामी की सरकार गिर गई। बसपा के एन महेश भी बगावती विधायकों के गुट को ज्वाइन करते हुए भाजपा में शामिल हो गए।
वोट शेयर में BSP बनी थी चौथे नंबर की पार्टी, इस बार क्या होगा?
2018 में जेडीएस के साथ गठबंधन करने वाली बसपा ने राज्य की 224 सीटों में से 18 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। चुनाव में एक सीट जीतने के साथ-साथ बसपा वोट शेयर के लिहाज से चौथे नंबर की पार्टी बनी थी। बीएसपी को कर्नाटक में 2018 में 1,06,809, 0.3% वोट मिले थे। 2018 से पहले बसपा ने कर्नाटक में 1994 के चुनाव में बिदर सीट जीती थी। बसपा के सामने इस बार अच्छा प्रदर्शन करने की चुनौती है लेकिन इस बार उसको जेडीएस का साथ नहीं है। ऐसे में पार्टी के प्रदर्शन पर सभी की नजरें हैं।