
इससे पहले एमएलसी के लिए पेश हुआ था नाम
संजय की सपा से नज़दीकी का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि राज्यसभा से पहले मनोनीत कोटे से संजय को विधान परिषद भेजने की तैयारी की जा रही थी। नामित विधान परिषद सदस्यों की लिस्ट भी इनका नाम था। लेकिन राज्यपाल राम नाईक ने नामित विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) कुछ नामों की सूची से सम्बंधित फाइल उत्तर प्रदेश सरकार को वापस भेज दी है। राज्यपाल की ओर से यह कहते हुए फाइल वापस भेजी कि इन नामों के व्यक्ति नामित एमएलसी बनने के योग्य नहीं।
बसपा से भी थी करीबियां
पिछले बसपा सरकार के दौरान भी संजय की कंपनी ने अच्छे प्रोजेक्ट किये थे। डॉ बी आर अम्बेडकर गोमती विहार पार्क ( भाग -1 और भाग- 2 ), हजरतगंज में एक मल्टी लेवल पार्किंग और वृंदावन कॉलोनी में पार्किंग का निर्माण किया था।
सपा एमएलसी की दौड़ में आते ही पड़ी इनकम टैक्स रेड
पिछले वर्ष जून से संजय का नाम एमएलसी की दौड़ में था। उसी दौरान इनकम टैक्स टीम द्वारा लखनऊ, दिल्ली , मुंबई और कोलकाता में शालीमार ग्रुप के 20 से भी अधिक ऑफिस में छापा मारा था।
बिल्डिरों को है खासा उम्मीदें
पहली बार हुआ है कि क्रेडाई का कोई सदस्य राज्यसभा सांसद बना है। राज्यसभा में व्यापार समुदाय का प्रतिनिधित्व होने पर इससे अन्य बिल्डिरों को काफी उम्मीदें है। ईवीएस इंफ्रास्ट्रक्चर के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर के मेंबर शशांक श्रीवास्तव का मानना है कि बिल्डिरों को होने वाली दिक्कतों से संजय सेठ वाकिफ है। निर्माण सामिग्री के रेट, प्रॉपर्टी पर टैक्स, मुआवज़ा सम्बंधित दिक्कतें जैसी कई दिक्कतें है जिनका सामना बिल्डरों को करना पड़ता है। संजय सेठ के आने से उन्हें उम्मीद है सरकार का ध्यान इन समस्याओं की ओर आएगा और आने वाली पॉलिसियों में बिल्डर समुदाय को ध्यान में रखा जाएगा।
क्रेडाई के लखनऊ चेयरमैन एस के गर्ग ने कहा कि संजय सेठ के नेतृत्व में युवा क्रेडाई टीम राज्य भर में युवा बिल्डिरों में जागरूकता पैदा करेगी। इससे कई अधिक मात्रा में लोग कोड ऑफ़ एथिक्स पर साइन कर बिल्डर्स की विश्वसनीयता बरकार रख सकेंगे।
संजय सेठ की प्रोफाइल
55 साल के संजय सेठ मूल रूप से उन्नाव निवासी है। वह लखनऊ विश्विद्यालय से कॉमर्स ग्रेजुएट है। संजय ने बिल्डर मार्किट में अपने पैर 1985 में एसएएस होटल्स एंड प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटिड नामित कंपनी शुरू की थी। इसी का बाद में नाम बदल कर शालीमार ग्रुप करा गया। शालीमार ग्रुप उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े बिल्डर ग्रुप्स में से एक है। इस ग्रुप के दिल्ली , यूपी और पंजाब में आने वाले प्रोजेक्ट 15 मिलियन स्क्वायर फिट से भी अधिल है।