
लखनऊ. डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के नवीन परिसर में बुधवार को कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में वुमन इंटरप्रेन्योरशिप फोरम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नारी शक्ति को नवाचार के माध्यम से स्वरोजगारपरक बनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
इस अवसर पर आयुर्वेद चिकित्सा की वरिष्ठ चिकित्सक डाक्टर वंदना पाठक बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहीं। कार्यक्रम में स्काईड्राईवर पदमश्री शीतल महाजन राने, पनाचे की फाउंडर तन्वी भट्ट, राईट वाक फाउंडेशन की फाउंडर डायरेक्टर समीना बानो, कैफ़ेबिज की सीईओ अपर्णा मिश्रा, देवरिया डिज़ाइन की फाउंडर पूजा शाही बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित रही।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने कहा कि भारतीय मनीषा में नारी को शक्ति के तौर पर स्थान प्राप्त है। आज हर क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। वर्तमान परिदृश्य में महिलाओं को और अधिक शोध एवं नवाचार के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है। आज इंजीनियरिंग की क्षेत्र में महिलाओं का प्रवेश प्रतिशत तेजी से बढ़ा है। ऐसे में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महिलाओं में स्वरोजगार के कौशल विकास की आवश्यकता नजर आ रही है। इसी क्रम में विवि द्वारा ऐसे कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
कार्यक्रम की मुख्यव क्ता डाक्टर वंदना पाठक ने कहा कि स्वरोजगारपरक बनने के लिए सबसे आवश्यक है कि हम अपने आत्मविश्वास में वृद्धि करें।स्वयं के स्तर से निर्णय लेने की क्षमता का विकास करें क्योंकि महिलाओ के जीवन के अधिकांश निर्णय परिजन एवं शादी के उपरांत पति पर निर्भर करते हैं, जिससे कई बार वह स्वयं को स्थापित करने के सपने को मूर्तरूप देने के लिए आश्वासनों पर निर्भर रह जाती हैं। कई बार उन्हें सीधे-सीधे घर संभालने की हिदायत दे दी जाती है। ऐसे में निर्णयों में आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और स्वयं की शक्ति के आकलन को पहचानने का कौशल विकसित करना होगा।
स्काईड्राईवर पद्मश्री शीतल महाजन राने ने कहा कि व्यक्ति को कुछ अलग करने के लिए और अपनी पहचान बनाने के लिए एक लम्बे समय तक संघर्ष करना होता है। बात जब महिला की हो तो हमारे स्टेरियोटाइप सिस्टम में बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शीतल महाजन से स्काईड्राईवर पद्मश्री शीतल महाजन बनने के लिए माता-पिता और समाज को बहुत बार समझाना पड़ा कि मैं भी स्काईड्राईवर बन सकती हूँ। यदि महिलाओं को कुछ बनना है तो सभी को समझाना होगा कि मैं भी यह कर सकती हूँ और मैं यह करूंगी तभी वह अपनी पहचान स्थापित कर पाएंगी।