लखनऊ

माया-ओवैसी की दोस्ती ! आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में आज़माया जा सकता है बिहार फ़ार्मूला

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 की बिसात बिछ चुकी है। आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में बिहार के बाद यूपी में मायावती और ओवैसी की दोस्ती कुछ नया कारनामा कर सकती है।

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Dec 13, 2020
माया-ओवैसी की दोस्ती ! आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में आज़माया जा सकता है बिहार फ़ार्मूला
माया-ओवैसी की दोस्ती ! आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में आज़माया जा सकता है बिहार फ़ार्मूला

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. यूपी विधानसभा चुनाव 2022 की बिसात बिछ चुकी है। आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में बिहार के बाद यूपी में मायावती और ओवैसी की दोस्ती कुछ नया कारनामा कर सकती है। बिहार विधानसभा चुनाव में बसपा और एआईएमआईएम का गठबंधन करिश्मा तो नहीं रच सका पर करीब आधा दर्जन सीटें जीत कर अपनी उपस्थिति को दर्ज करा दिया है। अब यूपी चुनाव की बारी है। एआईएमआईएम ने बसपा की तरफ हाथ बढ़ाया है। बसपा इस प्रापोजल को स्वीकार करती है या नहीं इसका इंतजार हो रहा है। अगर मायावती और असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में बिहार फ़ार्मूला आज़माया तो प्रदेश में राजनीतिक दलों के समीकरण कुछ गड़मड़ हो जाएंगे। इसके इतर ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पिछले एक माह में करीब 20 नए जिला अध्यक्ष बनाए गए हैं। साथ ही नए सदस्यों को जोड़ने का अभियान तेज कर दिया है।

भाजपा को अकेले कोई नहीं रोक सकता है :- ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन यूपी अध्यक्ष शौकत अली ने कहाकि, यूपी में ओवैसी-मायावती एकजुट होकर सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता में आने से रोक सकते हैं। भाजपा को समाजवादी पार्टी, बसपा और कांग्रेस अकेले नहीं रोक सकते हैं। यूपी में दलित और मुस्लिम समुदाय की समस्या एक जैसी है और आबादी भी तकरीबन बराबर है।

यूपी में बिहार फ़ार्मूला जरूरी : शौकत अली

शौकत अली ने कहाकि, बसपा बिना किसी सहारे के आगामी विधानसभा चुनाव में अच्छा परिणाम हासिल करने की स्थिति में नहीं है। पिछले चुनाव में बसपा के साथ चुनाव लड़ने का प्रयास किया गया था पर गठबंधन बन नहीं पाया। बिहार चुनाव में हम सफल रहे हैं और हमारी कोशिश है कि यूपी में इस बिहार फ़ार्मूला पर काम किया जाए।

अति पिछड़ा वोटर पर टारगेट :- पिछले दिनों बसपा में हुई मुस्लिम विधायकों की बगावत से बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती कुछ नाराज हुईं। और उत्तर प्रदेश में नए जातीय समीकरण बनाने में जुटी है। नए समीकरण में मुस्लिम वोटों पर फोकस अधिक करने के बजाय अति पिछड़ा वोटर को टारगेट कर रही है। यही वजह है कि प्रदेश की कमान भीम राजभर को सौंपी गई है।

गठबंधन पर विचार विमर्श जारी :- बहुजन समाज पार्टी के एक बड़े नेता ने बताया कि, मायावती-ओवैसी गठबंधन पर विचार विमर्श किया जा रहा है, पर अभी कोई ठोस निर्णय नहीं है। मुस्लिम विधायकों की बगावत की वजह से बसपा सुप्रीमो बेहद अलर्ट हैं। इसलिए मुस्लिम को साधने के लिए बसपा में एक अलग रणनीति बनाई जा रही है। इसी रणनीति के तहत ओवैसी के साथ गठबंधन करने का फॉर्मूला हैै। राजनीतिक विशलेषक की माने तो बसपा के सामने अब कोई विकल्प भी बाकी नहीं है।

Published on:
13 Dec 2020 04:15 pm