बसपा प्रमुख मायावती ने आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बयान दिया है। साथ ही उन्होंने भाजपा-कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कई सवाल दागे।
सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी कोटे के फैसले
पर बयान दिया है। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस को निशाने पर साधते हुए कहा कि एससी-एसटी और ओबीसी लेकर दोनों दलों का रवैया उदारवादी रहा है सुधारवादी नहीं।
मायावती ने सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण को लेकर दिए गए फैसले पर सवाल किए हैं। मायावती ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि दलितों व आदिवासियों का जीवन क्या द्वेष व भेदभाव-मुक्त हो गया है? ऐसे में आरक्षण का बंटवारा कितना उचित है? उन्होंने बीजेपी और कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि एससी-एसटी और ओबीसी को लेकर दोनों ही दलों का रवैया उदारवादी रहा है सुधारवादी नहीं।
आपको बता दें कि बृहस्पतिवार को दिए गए अपने फैसले में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी कोटे के भीतर कोटे को वैधानिक करार दिया है। साथ ही क्रीमी लेयर को आरक्षण से बाहर करने की भी बात की है।
मायावती ने सोशल साइट एक्स पर लिखा कि, ‘सामाजिक उत्पीड़न की तुलना में राजनीतिक़ उत्पीड़न कुछ भी नहीं। क्या देश के ख़ासकर करोड़ों दलितों व आदिवासियों का जीवन द्वेष व भेदभाव-मुक्त आत्म-सम्मान व स्वाभिमान का हो पाया है। अगर नहीं तो फिर जाति के आधार पर तोड़े व पछाड़े गए इन वर्गों के बीच आरक्षण का बंटवारा कितना उचित’?
‘देश के एससी, एसटी व ओबीसी बहुजनों के प्रति कांग्रेस व भाजपा दोनों ही पार्टियों/सरकारों का रवैया उदारवादी रहा है सुधारवादी नहीं। वे इनके सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति के पक्षधर नहीं वरना इन लोगों के आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में डालकर इसकी सुरक्षा जरूर की गयी होती’।