
Muskan Sahil Blue Drum Case Update:उत्तर प्रदेश के मेरठ के बहुचर्चित सौरभ हत्याकांड में नया अपडेट सामने आया है। ब्रह्मपुरी थाने के हेड मुहर्रिर अनुज गुप्ता और सिटी कंट्रोल रूम इंचार्ज ओमवीर मलिक ने अदालत में अपने बयान दर्ज कराए। दोनों अधिकारियों को बचाव पक्ष की वकील की अपील पर कोर्ट ने तलब किया था।
अदालत में बयान देते हुए दोनों पुलिसकर्मियों ने बताया कि थाने के CCTV फुटेज और वायरलेस संदेशों का रिकॉर्ड सामान्यतः केवल 90 दिनों तक ही सुरक्षित रखा जाता है। इसके बाद यह डेटा स्वतः डिलीट हो जाता है। यह जानकारी केस में अहम मानी जा रही है, क्योंकि बचाव पक्ष ने पुराने रिकॉर्ड की मांग की थी।
हेड मुहर्रिर अनुज गुप्ता ने 18 और 19 मार्च 2025 का जीडी (जनरल डायरी/रोजनामचा) रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत किया। जीडी में थाने में होने वाली हर गतिविधि और घटनाक्रम का विवरण दर्ज होता है, जो किसी भी जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है।
बहुचर्चित सौरभ हत्याकांड की अगली सुनवाई 12 मई को तय की गई है। इसी दिन से केस में अंतिम बहस शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे के अनुसार, यह मामला जिला सत्र न्यायाधीश अनुपम कुमार की अदालत में विचाराधीन है। अब तक 22 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और गवाही का चरण पूरा हो चुका है।
इस केस में अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 351 के तहत कार्रवाई की जा रही है, जो पहले सीआरपीसी की धारा 313 के रूप में जानी जाती थी। इस प्रक्रिया में आरोपी से साक्ष्यों के आधार पर सवाल-जवाब किए जाते हैं।
पिछले सप्ताह बचाव पक्ष की ओर से चार साक्ष्य-गवाहों की सूची अदालत में सौंपी गई थी। इसमें 18 मार्च 2025 को हुई गिरफ्तारी से जुड़े CCTV फुटेज, एक सप्ताह का जीडी रिकॉर्ड, वायरलेस मैसेज रिकॉर्ड और हत्या में प्रयुक्त चाकू की जांच करने वाले फोरेंसिक विशेषज्ञ को तलब करने की मांग की गई थी। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इस मांग पर आपत्ति जताते हुए कहा कि गवाहों के बयान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद कोर्ट ने फोरेंसिक विशेषज्ञ को छोड़कर थानेदार, हेड मुहर्रिर और वायरलेस ऑपरेटर को तलब करने का आदेश दिया था।
अब जबकि पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज हो चुके हैं, 12 मई से इस केस में अंतिम बहस शुरू होने जा रही है। इस सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसके बाद फैसला आने की दिशा साफ हो सकती है।