
Student Protester Nishu Azad Security Threat Claims: 14 वर्षीय छात्रा प्रदर्शनकारी निशु आजाद ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उन्हें और उनके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी जा रही है। लगातार मिल रही धमकियों की वजह से वे अपनी और परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं।
गुरुवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए निशु आजाद ने लिखा, 'माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद न तो मुझे और न ही मेरे परिवार को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की गई है।' उन्होंने दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस को टैग करते हुए तुरंत सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की अपील की। निशु ने कहा कि लगातार धमकियों के कारण वे सचमुच डरी हुई हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभिन्न राज्यों में उनके खिलाफ कई झूठे क्रॉस-एफआईआर दर्ज किए गए हैं। इससे उन्हें उन जगहों पर यात्रा करने का खतरा है जहां जानलेवा हमला हो सकता है।
निशु कक्षा 10 की छात्रा हैं और इस साल बोर्ड परीक्षाएं देने वाली हैं। धमकियों के कारण वे स्कूल और ट्यूशन नहीं जा पा रही हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा संबंधी चिंताएं उनकी पढ़ाई और भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।
यह पोस्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक दिन बाद आया। बता दें कि बुधवार को मुख्य न्यायधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ (जिसमें जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे) ने निशु को मिली धमकियों, रेप की धमकियों और घर पर पथराव के आरोपों पर गंभीर संज्ञान लिया। अदालत ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली से एफआईआर की स्थिति, परिवार की सुरक्षा व्यवस्था और हमले-धमकियों पर की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट मांगी।
आपको बता दें कि निशु कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़ी छात्र कार्यकर्ता हैं। जून 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान उनके पिता संजय आजाद पर हमला हुआ था। आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर मामला सुर्खियों में आया। इसके बाद निशु को अश्लील संदेश, धमकियां और घर पर पथराव जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा।
निशु ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का तुरंत पालन करते हुए पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील दोहराई है। परिवार की सुरक्षा और उनकी पढ़ाई की निरंतरता अब प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है।