इस बार पितृपक्ष में श्राद्ध के लिए लोगों को 15 नहीं बल्कि 14 दिन ही मिल रहे हैं.
लखनऊ. इस बार पितृपक्ष में श्राद्ध के लिए लोगों को 15 नहीं बल्कि 14 दिन ही मिल रहे हैं. आपको बता दें जो कार्य पितरों के लिए किये जाते हैं वह श्राद्ध कहलाते हैं. श्राद्ध ही पितरों का यज्ञ कहलाता है. देव ऋण ऋषि ऋण और पितृ ऋण इनमें से श्राद्ध की क्रिया से पितरों का पितृ ऋण उतारा जाता है.
विष्णु पुराण में कहा गया है कि श्राद्ध से तृप्त होकर पितृ ऋण समस्त कामनाओं को तृप्त करते हैं. आईये जानते हैं कि इस वर्ष पितृ पक्ष कब से शुरू हो रहे हैं और श्राद्ध की दैनिक तिथियां कब कब पड़ेंगी।
7 सितंबर से 20 सितंबर तक इस वर्ष पितृ पक्ष रहेंगे
-7 सितंबर 2017 दिन गुरुवार को प्रतिपदा श्राद्ध मनाया जाएगा
-08 सितंबर दिन शुक्रवार को द्वितीया श्राद्ध रहेगा
-09 सितंबर दिन शनिवार को तृतीया श्राद्ध रहेगा
-10 सितंबर दिन रविवार को चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध मनाया जाएगा
-11 सितंबर दिन सोमवार को षष्ठी श्राद्ध रहेगा
-12 सितंबर दिन मंगलवार को सप्तमी श्राद्ध रहेगा
-13 सितम्बर दिन बुधवार को महालक्ष्मी व्रत और अष्टका श्राद्ध रहेगा
-14 सितंबर दिन गुरुवार को नवमी श्राद्ध मात्र नवमी श्राद्ध मनाया जाएगा
-15 सितंबर दिन शुक्रवार को दशमी श्राद्ध मनाया जाएगा
-16 सितम्बर दिन शनिवार को एकादशी श्राद्ध मनाया जाएगा
-17 सितम्बर दिन रविवार को द्वादशी श्राद्ध सन्यासियों और वैष्णवों को मनाना चाहिए
-18 सितम्बर दिन सोमवार को त्रयोदशी एवं मघा श्राद्ध रहेगा
-20 सितम्बर दिन बुधवार को अमावस्या पितृविसर्जन होगा
पितृ पक्ष का महत्व (Importence Of Pitru Paksh )
ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार देवताओं को प्रसन्न करने से पहले मनुष्य को अपने पितरों यानी पूर्वजों को प्रसन्न करना चाहिए। हिन्दू ज्योतिष के अनुसार भी पितृ दोष को सबसे जटिल कुंडली दोषों में से एक माना जाना जाता है.पितरों की शांति के लिए हर वर्ष भाद्रपद शुक्लपूर्णिमा स अश्विन कृष्ण अमावस्या तक के काल को पितृ पक्ष श्राद्ध (pitru paksh) होते हैं.पितृपक्ष में श्राद्ध करने वाले लोग पितृदोष से मुक्त हो जाते हैं. श्राद्ध के इन दिनों को श्रद्धपूर्वक मनाना चाहिए