लखनऊ

धुरंधर-2 पर छिड़ा सियासी घमासान: रविदास मेहरोत्रा का पलटवार, कहा-नैतिकता है तो इस्तीफा दें पूजा पाल

उत्तर प्रदेश की सियासत में फिल्म 'धुरंधर-2' को लेकर शुरू हुआ विवाद अब निजी हमलों और दलबदल की नैतिकता तक पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता रविदास मेहरोत्रा ने भाजपा और अपनी ही पार्टी की बागी विधायक पूजा पाल पर तीखा हमला बोला है।
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Mar 25, 2026
Up politics

सपा के वरिष्ठ नेता रविदास मेहरोत्रा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा मुखिया अखिलेश यादव का जनाधार लगातार बढ़ रहा है, जिससे भाजपा और कुछ नेता घबरा हुए हैं, इसीलिए अब फिल्मों के जरिए 'प्रोपेगेंडा' फैलाया जा रहा है।

'सपा के वोट से बनीं विधायक, अब दिखा रहीं आंख'

रविदास मेहरोत्रा का यह बयान उस समय आया जब विधायक पूजा पाल ने 'धुरंधर-2' फिल्म का समर्थन करते हुए अतीक अहमद और समाजवादी पार्टी के रिश्तों पर गंभीर सवाल उठाए थे। इस पर पलटवार करते हुए मेहरोत्रा ने कहा, "पूजा पाल आज जिस पद पर बैठी हैं, वह समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के पसीने और जनता के भरोसे की देन है। यदि उनमें जरा सी भी नैतिकता बची है, तो उन्हें तुरंत विधायक पद से इस्तीफा देना चाहिए और दोबारा चुनाव लड़कर अपनी ताकत देखनी चाहिए। सपा के सिंबल पर जीतकर पार्टी के खिलाफ बोलना राजनीतिक अवसरवादिता है।"

पूजा पाल का गंभीर आरोप: सपा के संरक्षण में देश को खोखला किया

इससे पहले पूजा पाल ने फिल्म का हवाला देते हुए सपा को कटघरे में खड़ा किया था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अतीक अहमद ने न केवल उनके पति राजू पाल की हत्या की, बल्कि सपा के संरक्षण में रहते हुए वह एक 'दीमक' की तरह देश को भीतर से खोखला कर रहा था। पूजा पाल के मुताबिक, अतीक के गैंग ने जाली नोटों के कारोबार और नशे के जरिए हजारों परिवारों को तबाह किया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा ऐसे अपराधियों को ढाल दी, जिससे समाज का भारी नुकसान हुआ।

अखिलेश यादव का 'एजेंडा' वाला वार

इस पूरे विवाद की जड़ में फिल्म 'धुरंधर-2' है, जिसे लेकर अखिलेश यादव पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने कहा था कि भाजपा अब सीधे राजनीतिक लड़ाई हार रही है, इसलिए फिल्मों का सहारा लेकर विपक्षी दलों को बदनाम करने का एजेंडा चला रही है। रविदास मेहरोत्रा ने इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जनता सब समझती है। अखिलेश यादव के प्रति बढ़ता जनसमर्थन देखकर भाजपा घबरा गई है और इसीलिए पुराने गड़े मुर्दे उखाड़कर और काल्पनिक कहानियों के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

क्या है सियासी मायने?

लखनऊ के गलियारों में चर्चा है कि चुनाव से ठीक पहले 'धुरंधर-2' जैसी फिल्मों और पूजा पाल जैसे नेताओं के बयानों ने सपा के लिए 'डैमेज कंट्रोल' की स्थिति पैदा कर दी है। एक तरफ जहां भाजपा इसे 'सच्चाई का आईना' बता रही है, वहीं सपा इसे 'चुनावी स्टंट' करार दे रही है। फिलहाल, रविदास मेहरोत्रा के 'इस्तीफे' वाले चैलेंज ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

Updated on:
25 Mar 2026 12:04 am
Published on:
25 Mar 2026 12:03 am